हरियाणा में प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। सरकार ने संपत्ति कर की गणना के लिए नया फॉर्मूला मंजूर किया है। अब टैक्स तय करते समय संपत्ति का क्षेत्रफल, कलेक्टर रेट, फ्लोर फैक्टर और उसके इस्तेमाल को आधार बनाया जाएगा। यानी आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक और संस्थागत संपत्तियों के लिए टैक्स की गणना अलग-अलग तरीके से हो सकती है।
सवाल: क्या सभी लोगों का प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ेगा?
नहीं। नई व्यवस्था में हर संपत्ति पर एक समान बढ़ोतरी नहीं होगी। टैक्स संपत्ति के आकार, स्थान, कलेक्टर रेट और उपयोग के आधार पर तय होगा। सरकार ने बढ़ी हुई टैक्स देनदारी को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रावधान रखा है, ताकि संपत्ति मालिकों पर अचानक ज्यादा आर्थिक बोझ न पड़े।
सवाल: किन लोगों को टैक्स में राहत मिलेगी?
धार्मिक संस्थानों, सरकारी स्कूलों और अस्पतालों, कृषि संपत्तियों, गौशालाओं, अनाथालयों, श्मशान घाटों और कुछ धर्मार्थ संस्थाओं को राहत का प्रावधान है। गांवों के लाल डोरा क्षेत्र में आने वाली आवासीय संपत्तियों पर भी 75 प्रतिशत rebate का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा समय पर भुगतान करने वालों, नियमित रूप से टैक्स जमा कराने वालों, महिला संपत्ति मालिकों और दिव्यांग व्यक्तियों समेत कुछ श्रेणियों को अतिरिक्त rebate मिल सकता है।
सवाल: पुराने बकाये पर क्या राहत है?
वर्ष 2010-11 से 2024-25 तक के बकाया प्रॉपर्टी टैक्स पर 75 प्रतिशत ब्याज माफी का प्रावधान किया गया है। पात्र संपत्ति मालिकों को निर्धारित समय सीमा में बकाया राशि जमा करने के साथ अपनी संपत्ति की जानकारी का self-certification करना होगा।
सवाल: जुर्माना या अतिरिक्त शुल्क कब लगेगा?
टैक्स समय पर जमा नहीं करने पर लागू नियमों के अनुसार ब्याज या अन्य देनदारी लग सकती है। इसलिए संपत्ति मालिकों को भुगतान की अंतिम तारीख और अपने नगर निकाय की लागू दरों की जानकारी समय रहते जांच लेनी चाहिए।
नई व्यवस्था का उद्देश्य प्रॉपर्टी टैक्स की गणना को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है। संपत्ति मालिकों के लिए जरूरी है कि वे अपने रिकॉर्ड और संपत्ति की जानकारी सही रखें, ताकि टैक्स की गणना में किसी तरह की परेशानी न हो।
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