कांवड़ यात्रा से यमुनानगर का लकड़ी कारोबार प्रभावित, 11 अगस्त तक बंद रहेंगी मंडियां

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Yamunanagar News

यमुनानगर में कांवड़ यात्रा के चलते लकड़ी कारोबार पर असर पड़ा है। जिले की लक्कड़ मंडियां 11 अगस्त तक बंद रखने का फैसला लिया गया है। मंडियों के बंद रहने से जिले की करीब 350 प्लाईवुड फैक्ट्रियों के सामने कच्चे माल की उपलब्धता को लेकर चुनौती खड़ी हो गई है। लकड़ी प्लाईवुड उद्योग के लिए सबसे जरूरी कच्चे माल में शामिल है, इसलिए मंडियों के बंद रहने से सप्लाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।

कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों से होकर अपने गंतव्य की ओर जाते हैं। यात्रा के दौरान सड़कों पर बढ़ने वाली भीड़ और वाहनों की आवाजाही को देखते हुए कई जगहों पर ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया जाता है। इसी का असर यमुनानगर के लकड़ी कारोबार पर भी देखने को मिल रहा है।

लक्कड़ मंडियां बंद रहने के कारण लकड़ी की खरीद-बिक्री और परिवहन पर रोक जैसी स्थिति रहेगी। इससे प्लाईवुड फैक्ट्री संचालकों को अपने मौजूदा स्टॉक से उत्पादन जारी रखना पड़ सकता है। जिन इकाइयों के पास पर्याप्त लकड़ी का स्टॉक नहीं है, उनके लिए उत्पादन प्रभावित होने की संभावना अधिक है।

यमुनानगर देश के प्रमुख प्लाईवुड और लकड़ी कारोबार केंद्रों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में फैक्ट्रियों के अलावा लकड़ी व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, मजदूर और अन्य कारोबारी भी इस उद्योग से जुड़े हैं। ऐसे में मंडियों के बंद रहने का असर केवल फैक्ट्री संचालकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे जुड़े दूसरे कारोबारियों पर भी पड़ सकता है।

फैक्ट्री संचालकों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चिंता उत्पादन के लिए जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता है। हालांकि, जिन इकाइयों के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, वे कुछ समय तक उत्पादन जारी रख सकती हैं। मंडियां खुलने के बाद लकड़ी की खरीद-बिक्री और सप्लाई व्यवस्था सामान्य होने की उम्मीद है।

11 अगस्त तक मंडियां बंद रहने के बाद कारोबार दोबारा शुरू होने पर सप्लाई में तेजी आने की संभावना है। फिलहाल प्लाईवुड उद्योग से जुड़े कारोबारियों की नजर मंडियों के खुलने और कच्चे माल की उपलब्धता पर बनी हुई है।

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