हरियाणा के हांसी से जुड़े बाबा के समर्थन में जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ी एक शिक्षिका खुलकर सामने आई हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से बाबा के पक्ष में अपनी बात रखते हुए कहा कि यदि कार्रवाई करनी है तो सभी धार्मिक डेरों और संस्थाओं के मामलों को समान रूप से देखा जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने धर्मेंद्र हुड्डा को भी खुली चुनौती देते हुए अपने विचार सार्वजनिक किए।
शिक्षिका ने कहा कि किसी एक संस्था या व्यक्ति को निशाना बनाना उचित नहीं है। उनका कहना था कि यदि कानून के अनुसार जांच और कार्रवाई की जाती है तो उसका दायरा सभी संबंधित मामलों तक समान रूप से होना चाहिए। उन्होंने अपने वक्तव्य में विभिन्न धार्मिक डेरों का भी उल्लेख किया।
इस बयान के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग शिक्षिका के बयान का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कई लोगों ने इसका विरोध भी जताया है।
फिलहाल इस मामले में संबंधित पक्षों की ओर से अपने-अपने बयान सामने आ रहे हैं। प्रशासन की ओर से इस बयान को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। मामले से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक मंचों पर दिए गए ऐसे बयानों को कानून और उपलब्ध तथ्यों के दायरे में ही देखा जाना चाहिए। किसी भी प्रकार के आरोप या दावे की पुष्टि संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही संभव होती है।
फिलहाल यह मामला सार्वजनिक बहस का विषय बना हुआ है। आगे यदि संबंधित पक्षों या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी होता है तो उसी के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
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