झज्जर में खारे पानी वाली जमीन से किसान ने बनाई कमाई की राह, 2 हेक्टेयर में झींगा पालन से 20 टन तक उत्पादन

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Jhajjar Shrimp Farming

झज्जर : जिस खारे पानी से प्रभावित जमीन को किसान आमतौर पर पारंपरिक खेती के लिए चुनौती मानते हैं, उसी जमीन को झज्जर के कुतानी गांव के किसान श्यामपाल चौहान ने आय का जरिया बना लिया है। उन्होंने करीब दो हेक्टेयर भूमि पर झींगा पालन शुरू किया और अब सालाना उत्पादन करीब 20 टन तक पहुंचने का दावा कर रहे हैं।

श्यामपाल चौहान के अनुसार उनकी जमीन खारे पानी से प्रभावित थी। इस कारण पारंपरिक फसलों की खेती करना मुश्किल हो रहा था। जमीन को खाली छोड़ने के बजाय उन्होंने इसके वैकल्पिक इस्तेमाल की जानकारी जुटानी शुरू की। इसी दौरान उन्हें खारे पानी में झींगा पालन की संभावना के बारे में पता चला।

इसके बाद उन्होंने मत्स्य विभाग से संपर्क किया। विभाग की ओर से झींगा पालन से संबंधित प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी दी गई। इसमें तालाब तैयार करने, झींगा बीज डालने, पानी की गुणवत्ता की निगरानी, फीड प्रबंधन और पालन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी शामिल थी।

प्रशिक्षण लेने के बाद श्यामपाल ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के दिशा-निर्देशों के अनुरूप झींगा पालन की शुरुआत की। उन्होंने करीब 40 लाख रुपए का निवेश कर भटेरा क्षेत्र में लगभग दो हेक्टेयर भूमि पर तालाब तैयार कराया।

शुरुआत आसान नहीं रही। खारे पानी की गुणवत्ता को सही स्तर पर बनाए रखना और तालाब का नियमित प्रबंधन उनके सामने बड़ी चुनौती थी। श्यामपाल का कहना है कि उन्होंने मत्स्य विभाग से मिले तकनीकी मार्गदर्शन के अनुसार तालाब और पानी की लगातार निगरानी की।

इस काम में उनकी पत्नी मीना चौहान भी सहयोग कर रही हैं। परिवार ने नियमित निगरानी और तकनीकी सलाह के आधार पर झींगा पालन को आगे बढ़ाया।

श्यामपाल के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में उनके यहां करीब 18 टन झींगा उत्पादन हुआ था। अगले वित्त वर्ष 2025-26 में यह उत्पादन बढ़कर करीब 20 टन तक पहुंच गया।

उनका कहना है कि बाजार में झींगा उन्हें गुणवत्ता और समय के अनुसार करीब 380 से 480 रुपए प्रति किलो तक के भाव पर बिका। सभी खर्च निकालने के बाद झींगा पालन से सालाना करीब 15.90 से 17 लाख रुपए तक की शुद्ध आय होने का उनका दावा है।

जिस जमीन पर पहले सामान्य खेती करना मुश्किल था, अब वही जमीन परिवार के लिए आय का प्रमुख साधन बन गई है। श्यामपाल का कहना है कि शुरुआत में नए काम में निवेश करने को लेकर आशंका थी, लेकिन प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी मिलने के बाद उन्होंने इसे अपनाने का निर्णय लिया।

खारे और लवणीय क्षेत्रों में जलीय कृषि को बढ़ावा देना प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के उद्देश्यों में शामिल है। ऐसे क्षेत्रों में झींगा पालन को वैकल्पिक आय के साधन के रूप में विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है।

श्यामपाल का कहना है कि खारे पानी से प्रभावित जमीन वाले किसान भी सीधे निवेश करने से पहले मत्स्य विशेषज्ञों से अपनी जमीन और पानी की जांच कराकर तकनीकी जानकारी हासिल कर सकते हैं। सही प्रबंधन और अनुकूल परिस्थितियों में ऐसी जमीन का वैकल्पिक उपयोग किया जा सकता है।

कुतानी के किसान का यह प्रयोग दिखाता है कि तकनीकी मार्गदर्शन और वैकल्पिक कृषि गतिविधियों के जरिए खेती के लिए चुनौतीपूर्ण मानी जाने वाली जमीन का भी व्यावसायिक उपयोग संभव हो सकता है।

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