हरियाणा के हिसार में एक परिवार ने सादगी और सामाजिक संदेश की अनूठी मिसाल पेश करते हुए अपने दो बेटों की सगाई मात्र एक रुपये के शगुन से संपन्न कराई। पूर्व सरपंच पिता ने दोनों परिवारों द्वारा दिए गए लाखों रुपये के शगुन और उपहार सम्मानपूर्वक लौटाते हुए कहा कि उनके लिए बहू बनकर आने वाली बेटियां ही सबसे बड़ी दौलत हैं।
जानकारी के अनुसार, परिवार के एक बेटे भारतीय सेना में कार्यरत हैं, जबकि दूसरे बेटे प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े हैं। सगाई समारोह में दोनों परिवारों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ कार्यक्रम आयोजित किया, लेकिन लेन-देन की परंपरा से दूर रहकर केवल एक रुपये का प्रतीकात्मक शगुन स्वीकार किया गया।
पूर्व सरपंच ने कहा कि विवाह कोई आर्थिक लेन-देन का माध्यम नहीं, बल्कि दो परिवारों का पवित्र रिश्ता होता है। उन्होंने समाज से दहेज और दिखावे जैसी कुरीतियों को छोड़कर सादगीपूर्ण विवाह करने की अपील की। उनका कहना था कि बेटियों का सम्मान सबसे बड़ा उपहार है और समाज को इसी सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
समारोह में मौजूद लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे उदाहरण समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का काम करते हैं। कई लोगों ने इसे दहेज प्रथा के खिलाफ एक प्रेरणादायक संदेश बताया।
परिवार का कहना है कि उनका उद्देश्य समाज में यह संदेश देना है कि रिश्तों की नींव प्रेम, सम्मान और विश्वास पर होनी चाहिए, न कि धन और दिखावे पर। उन्होंने युवाओं और अभिभावकों से भी सादगीपूर्ण विवाह को बढ़ावा देने की अपील की।
इस अनोखी सगाई की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह की पहल समाज में दहेज मुक्त और सादगीपूर्ण विवाह की सोच को मजबूत करेगी।
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