सफीदों, (एस• के• मित्तल) : सफीदों उपमंडल के गांव धर्मगढ़ बोहली के 23 वर्षीय युवक गुरकीरत सिंह की इंग्लैंड में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। शुक्रवार को जब युवक का शव गांव पहुंचा तो माहौल गमगीन हो गया। गांव के लोग बड़ी संख्या में उसके घर पहुंचे और परिजनों को ढांढस बंधाया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। बाद में पूरे विधि-विधान के साथ गांव के श्मशान घाट में उसका अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक क्षेत्र के कई लोग शामिल हुए। मिली जानकारी के अनुसार, गुरकीरत पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट टाइम नौकरी भी करता था। घटना वाले दिन भी वह अपनी ड्यूटी खत्म करने के बाद रोजाना की तरह पास के पार्क में टहलने गया था, लेकिन इसके बाद वह अपने कमरे पर वापस नहीं लौटा। देर रात तक उसके वापस न आने पर उसके साथियों ने उसकी तलाश शुरू की। अगली सुबह उसी पार्क में उसका शव संदिग्ध अवस्था में मिला। बता दें कि गुरकीरत सिंह वर्ष 2022 में बीटेक की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड के वॉर्सेस्टर गया था। दिसंबर 2025 में उसने अपनी पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी कर ली थी और उसे वर्क परमिट भी मिल चुका था। परिवार के लिए गर्व का क्षण तब आया जब दो दिन पहले ही उसे एक प्रतिष्ठित मल्टीनेशनल कंपनी से नौकरी का ऑफर लेटर मिला था। उसने यह खुशखबरी अपने पिता सतनाम सिंह और दादा के साथ फोन पर साझा की थी। करीब 35 मिनट तक चली बातचीत में वह बेहद खुश और अपने उज्ज्वल भविष्य को लेकर उत्साहित नजर आ रहा था। गुरकीरत के पिता सतनाम सिंह हरियाणा रोडवेज में कंडक्टर के पद पर कार्यरत हैं और सेना में हवलदार रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि उनका बेटा बेहद मेहनती और सकारात्मक सोच वाला था। उन्होंने भावुक होकर कहा, “उसने
बार कहा था— पिताजी अब सो जाओ, सुबह आपको ड्यूटी पर जाना है।” यह शब्द अब परिवार के लिए आखिरी याद बनकर रह गए हैं। गुरकीरत सिंह दो भाइयों में बड़ा था। उसका छोटा भाई अभी पढ़ाई कर रहा है। परिवार में दादा बेअंत सिंह किसान हैं, जबकि माता नरेंद्र कौर गृहिणी हैं। परिवार का सैन्य पृष्ठभूमि से गहरा जुड़ाव रहा है। ताऊ लखविंदर सिंह सूबेदार और चाचा कश्मीर सिंह भी सेना से सेवानिवृत्त हैं।
बार कहा था— पिताजी अब सो जाओ, सुबह आपको ड्यूटी पर जाना है।” यह शब्द अब परिवार के लिए आखिरी याद बनकर रह गए हैं। गुरकीरत सिंह दो भाइयों में बड़ा था। उसका छोटा भाई अभी पढ़ाई कर रहा है। परिवार में दादा बेअंत सिंह किसान हैं, जबकि माता नरेंद्र कौर गृहिणी हैं। परिवार का सैन्य पृष्ठभूमि से गहरा जुड़ाव रहा है। ताऊ लखविंदर सिंह सूबेदार और चाचा कश्मीर सिंह भी सेना से सेवानिवृत्त हैं। ![]()











