पंचकूला नगर निगम में डिप्टी मेयर के चुनाव में लगातार हो रही देरी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। चुनाव प्रक्रिया 76 दिनों से अटकी हुई है, जिसके कारण नगर निगम के कामकाज और राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। निगम में BJP के 17 पार्षद होने के बावजूद अब तक डिप्टी मेयर का चुनाव नहीं हो पाया है।
डिप्टी मेयर का पद नगर निगम की व्यवस्था में महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में लंबे समय तक पद खाली रहने से निगम के कामकाज पर इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विपक्ष और कुछ पार्षदों की ओर से चुनाव में देरी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं और जल्द प्रक्रिया पूरी करने की मांग की जा रही है।
नगर निगम में BJP के पास 17 पार्षद होने के बावजूद चुनाव का रास्ता साफ नहीं हो सका है। यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि आखिर चुनाव में पेंच कहां फंसा हुआ है। पार्टी के भीतर संभावित उम्मीदवारों को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है या फिर किसी अन्य स्तर पर प्रक्रिया अटकी हुई है, इसे लेकर अलग-अलग चर्चाएं हैं।
डिप्टी मेयर पद के लिए संभावित दावेदारों को लेकर भी पार्षदों के बीच समीकरण बनने की बात कही जा रही है। स्थानीय राजनीति में अलग-अलग गुटों की सक्रियता और समर्थन जुटाने की कोशिशें चुनाव को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि वास्तविक स्थिति पार्टी और निगम प्रशासन की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने आने के बाद ही साफ होगी।
लंबे समय से चुनाव नहीं होने के कारण निगम के सामान्य कामकाज को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पार्षदों का कहना है कि नगर निगम में सभी महत्वपूर्ण पदों पर व्यवस्था सुचारु रहना जरूरी है, ताकि शहर से जुड़े विकास कार्यों और नागरिक समस्याओं का समाधान तेजी से हो सके।
अब निगाहें निगम प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जल्द चुनाव की तारीख तय होती है तो लंबे समय से चल रही राजनीतिक खींचतान पर विराम लग सकता है। वहीं देरी जारी रहने पर यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।
फिलहाल 76 दिन से लंबित डिप्टी मेयर चुनाव पंचकूला नगर निगम की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। BJP के 17 पार्षद होने के बावजूद चुनाव क्यों नहीं हो रहा, इसका स्पष्ट जवाब सामने आना बाकी है।
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