गुरुग्राम में किसानों की मांगों पर खट्टर से बनी सहमति, प्रतिनिधियों का दावा- पहली बार मिला सरकार से सकारात्मक जवाब

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Gurugram Farmers

गुरुग्राम में अपनी लंबित मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे किसानों की केंद्रीय मंत्री एवं हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ हुई बैठक के बाद समाधान की उम्मीद बढ़ी है। किसान प्रतिनिधियों का दावा है कि बैठक में उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक बातचीत हुई और सरकार की ओर से पहली बार उन्हें ठोस एवं सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।

बैठक के दौरान किसानों ने जमीन और मुआवजे सहित अपनी विभिन्न मांगों को केंद्रीय मंत्री के सामने रखा। किसान लंबे समय से इन मुद्दों को लेकर सरकार और प्रशासन के सामने अपनी बात रख रहे हैं। प्रतिनिधियों ने बैठक में पुराने मामलों और अब तक हुई कार्रवाई की स्थिति से भी खट्टर को अवगत कराया।

किसान नेताओं के अनुसार मनोहर लाल खट्टर ने उनकी बातों को विस्तार से सुना और मांगों के समाधान को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया। किसानों का दावा है कि कई मुद्दों पर सहमति बनी है और संबंधित स्तर पर आगे की कार्रवाई का भरोसा मिला है।

बैठक के बाद किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि लंबे आंदोलन के दौरान सरकार और प्रशासन के साथ कई बार बातचीत हुई, लेकिन इस बार का जवाब पहले की तुलना में अधिक सकारात्मक रहा। इससे किसानों में मांगों के समाधान की उम्मीद जगी है।

हालांकि किसान नेताओं ने साफ किया कि केवल बातचीत या आश्वासन मिलने से आंदोलन का उद्देश्य पूरा नहीं माना जाएगा। उनकी वास्तविक संतुष्टि तभी होगी, जब जिन मांगों पर सहमति बनी है उन्हें सरकारी स्तर पर लागू किया जाएगा।

किसानों ने कहा कि बैठक के बाद अब उनकी नजर संबंधित विभागों की कार्रवाई पर रहेगी। जिन विषयों पर प्रशासनिक आदेश या नीतिगत निर्णय जरूरी हैं, उन पर लिखित कार्रवाई होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

प्रतिनिधियों के मुताबिक किसानों का उद्देश्य सरकार के साथ टकराव बढ़ाना नहीं, बल्कि लंबे समय से लंबित समस्याओं का स्थायी समाधान कराना है। यदि सरकार बैठक में हुई बातचीत के अनुरूप कदम उठाती है तो इससे किसान और प्रशासन के बीच जारी विवाद को खत्म करने का रास्ता खुल सकता है।

गुरुग्राम में तेजी से हुए शहरीकरण और विकास परियोजनाओं के कारण जमीन से जुड़े कई मुद्दे समय-समय पर सामने आते रहे हैं। किसानों की मांगों में जमीन और मुआवजे से संबंधित विषय महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे मामलों में प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट निर्णय किसानों के लिए अहम होता है।

बैठक के बाद किसानों ने फिलहाल सरकार के अगले कदम का इंतजार करने की बात कही है। उनका कहना है कि मांगों को लागू करने की प्रक्रिया और उसकी समयसीमा सामने आने के बाद आगे की रणनीति पर निर्णय लिया जाएगा।

किसान प्रतिनिधियों ने दोहराया कि पहली बार उन्हें सरकार की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने का अनुभव हुआ है, लेकिन आंदोलन की सफलता का आकलन धरातल पर होने वाली कार्रवाई से किया जाएगा।

फिलहाल मनोहर लाल खट्टर के साथ हुई बैठक के बाद किसान संगठनों और सरकार के बीच गतिरोध कम होने की उम्मीद बनी है। किसानों का कहना है कि जिन मुद्दों पर सहमति बनी है, उनके लागू होने के बाद ही वे पूरी तरह संतुष्ट होंगे।

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