गुरुग्राम के सीनियर फायर ऑफिसर के खिलाफ जमानती वारंट, RTI की सुनवाई में गैरहाजिरी पर सूचना आयोग सख्त; 1 अक्टूबर को पेशी

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Gurugram Fire Officer

गुरुग्राम : हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने गुरुग्राम के सीनियर फायर ऑफिसर के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। मामला सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराने और आयोग की सुनवाई में कथित रूप से बार-बार गैरहाजिर रहने से जुड़ा है। आयोग ने गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर के माध्यम से वारंट तामील कराने और एक अक्टूबर को संबंधित अधिकारी की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

यह मामला आरटीआई कार्यकर्ता हरिंद्र ढींगड़ा की याचिका से जुड़ा है। उन्होंने गुरुग्राम में 16 मीटर से अधिक ऊंची इमारतों की फायर NOC और अग्नि सुरक्षा नियमों के अनुपालन से संबंधित कई रिकॉर्ड मांगे थे।

आवेदन में यह जानकारी भी मांगी गई थी कि यदि कोई बहुमंजिला इमारत या व्यावसायिक परिसर अनिवार्य फायर NOC के लिए आवेदन नहीं करता है तो उसके खिलाफ किन कानूनों, नियमों, बाय-लॉज, सर्कुलर और विभागीय दिशा-निर्देशों के तहत कार्रवाई की जाती है। इसके साथ दंड, जुर्माने या अन्य कानूनी कार्रवाई से संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां मांगी गई थीं।

आरटीआई आवेदन में गुरुग्राम के कई प्रमुख सरकारी परिसरों के फायर सेफ्टी रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी भी मांगी गई। इनमें मिनी सचिवालय, सोहना चौक स्थित पुलिस कमिश्नर कार्यालय, नगर निगम कार्यालय, हुडा प्रशासक कार्यालय, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग से जुड़े कार्यालय, जिला कोर्ट परिसर, HSIIDC और कादरपुर स्थित CRPF कॉम्प्लेक्स जैसे परिसरों का उल्लेख किया गया था।

आवेदक ने इन परिसरों को हरियाणा फायर सर्विसेज से जुड़े प्रावधानों के तहत जारी किए गए नोटिसों की जानकारी के साथ संबंधित फाइल, नोटशीट, कार्यालय ज्ञापन और विभाग की ओर से की गई कार्रवाई के रिकॉर्ड भी मांगे थे।

मांगी गई सूचना नहीं मिलने के बाद मामला हरियाणा राज्य सूचना आयोग के पास पहुंचा। आयोग के समक्ष हुई कार्यवाही में संबंधित अधिकारी की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठे।

आयोग ने अपने आदेश में अधिकारी के रवैये पर नाराजगी जाहिर करते हुए इसे RTI कानून के अनुपालन से जुड़ा गंभीर मामला माना है। बताया गया है कि सुनवाई के लिए समन जारी होने के बावजूद संबंधित अधिकारी निर्धारित तारीखों पर उपस्थित नहीं हुए और आयोग के सामने उचित स्पष्टीकरण भी नहीं रखा गया।

इसके बाद आयोग ने सख्त कदम उठाते हुए जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया। वारंट गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर के माध्यम से तामील कराया जाना है। पुलिस को संबंधित अधिकारी की एक अक्टूबर को आयोग के समक्ष उपस्थिति सुनिश्चित कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

हालांकि मामले में सीनियर फायर ऑफिसर नरेंद्र यादव ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि यह पुराना मामला प्रतीत हो रहा है। उनके अनुसार अभी तक उन्हें सूचना आयोग के आदेश की प्रति नहीं मिली है।

नरेंद्र यादव का कहना है कि आदेश की कॉपी मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि संबंधित RTI मामला उनके कार्यकाल से जुड़ा है या किसी पूर्व अधिकारी के समय का है।

ऐसे में संबंधित सूचना उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी किस अधिकारी के कार्यकाल से जुड़ी थी और आयोग के समन पर अनुपस्थिति किन परिस्थितियों में हुई, इन पहलुओं पर अधिकारी का विस्तृत पक्ष आदेश की प्रति मिलने के बाद सामने आ सकता है।

जमानती वारंट जारी होना अपने आप में किसी अधिकारी को अंतिम रूप से दोषी ठहराया जाना नहीं है। आयोग ने फिलहाल संबंधित अधिकारी की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए यह प्रक्रिया अपनाई है। मामले में अगली महत्वपूर्ण कार्यवाही एक अक्टूबर को निर्धारित है।

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