सिरसा में दूध के दाम बढ़ाने को लेकर लामबंद हुए पशुपालक, भैंस का ₹100 और देसी गाय का ₹80 किलो रेट करने की मांग; 19 सितंबर को जिला स्तरीय बैठक

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Sirsa Milk Price

सिरसा : जिले में दूध के नए रेट तय करने और मिलावटी दुग्ध उत्पादों पर रोक लगाने की मांग को लेकर किसान और पशुपालक लामबंद होने लगे हैं। पशुपालकों का कहना है कि शुद्ध दूध का उचित मूल्य नहीं मिलने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस मुद्दे पर गांव स्तर से अभियान शुरू कर राज्य स्तरीय कमेटी बनाने और मुख्यमंत्री के सामने मांग रखने की तैयारी की जा रही है।

इसी सिलसिले में गांव मंगाला स्थित गुरुद्वारा बाबा भूमन शाह में आसपास के गांवों के किसानों, मजदूरों और पशुपालकों की बैठक हुई। इसमें मंगाला, ढाणी काहन सिंह, टीटू खेड़ा और सलारपुर समेत आसपास के क्षेत्रों से लोग शामिल हुए।

बैठक में दूध के दाम बढ़ाने के साथ बाजार में कथित तौर पर बिक रहे नकली और मिलावटी दूध, खोया, मावा, क्रीम तथा अन्य दुग्ध उत्पादों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। पशुपालकों ने सरकार से मिलावट के खिलाफ सख्त कार्रवाई और शुद्ध दूध को प्रोत्साहित करने की मांग की।

पशुपालकों का कहना है कि फिलहाल अलग-अलग क्षेत्रों और खरीदारों के हिसाब से दूध के दामों में काफी अंतर रहता है। उनका तर्क है कि यदि सरकार और दुग्ध प्लांट फैट के आधार पर बेहतर दरें निर्धारित करें तो पशुपालकों को दूध बेचने के लिए एक स्पष्ट आधार मिल सकेगा।

बैठक में भैंस के दूध का भाव 100 रुपए प्रति किलो और देसी, राठी तथा साहीवाल गाय के दूध का भाव 80 रुपए प्रति किलो करने की मांग रखी गई। हालांकि पशुपालकों ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी प्रकार के दूध के लिए एक समान दर व्यावहारिक नहीं होगी।

उनका कहना है कि गायों की नस्ल और दूध में फैट की मात्रा अलग-अलग होती है। कम फैट वाले दूध की कीमत उसी के अनुरूप निर्धारित होनी चाहिए। पशुपालकों के मुताबिक उनकी मुख्य मांग यह है कि दूध की गुणवत्ता और फैट को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था बने जिससे उत्पादक को उचित मूल्य मिल सके।

किसान नेताओं का कहना है कि अभी अलग-अलग गांवों में पशुपालक अपने स्तर पर दूध के नए दामों को लेकर घोषणाएं कर रहे हैं। इससे पूरे प्रदेश में एक समान व्यवस्था नहीं बन पा रही। इसलिए सरकार के स्तर पर स्पष्ट नीति या मूल्य निर्धारण व्यवस्था की मांग की जा रही है।

पशुपालकों के प्रतिनिधिमंडल की ओर से मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन दिए जाने की बात भी कही गई। किसान नेताओं का दावा है कि अभी तक उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। इसी कारण अब गांव स्तर पर बैठकें कर आंदोलन को जिला और फिर राज्य स्तर तक ले जाने की योजना बनाई जा रही है।

बैठक में मिलावटी दुग्ध उत्पादों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। किसानों और पशुपालकों ने कहा कि नकली या मिलावटी दूध और उससे बने उत्पाद बाजार में आने से वास्तविक पशुपालकों को प्रतिस्पर्धा में नुकसान होता है। साथ ही उन्होंने ऐसे उत्पादों को लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक बताते हुए नियमित जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की।

पशुपालकों का कहना है कि शुद्ध और ताजा दूध की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए उपभोक्ताओं को भी जागरूक करना जरूरी है। इसके लिए गांव-गांव बैठकें कर लोगों को अभियान से जोड़ने की योजना बनाई गई है।

इस आंदोलन की अगली कड़ी के रूप में 19 सितंबर को गुरुद्वारा चिल्ला साहिब में जिला स्तरीय बैठक बुलाई गई है। मैक्स साहूवाला के अनुसार इस बैठक में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पशुपालक और किसान शामिल होकर दूध के रेट और मिलावट के मुद्दे पर अपने सुझाव रखेंगे।

जिला स्तरीय बैठक के बाद राज्य स्तर पर कमेटी गठित करने की योजना है। यह कमेटी मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पशुपालकों की मांगों को सरकार के सामने रखेगी। इसमें दूध के उचित मूल्य, फैट आधारित दरों और मिलावटी दुग्ध उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई को प्रमुख मुद्दा बनाया जाएगा।

फिलहाल 100 रुपए और 80 रुपए प्रति किलो की दरें पशुपालकों की मांग हैं, सरकार की ओर से निर्धारित आधिकारिक रेट नहीं हैं। इस संबंध में अंतिम निर्णय सरकार, संबंधित विभागों और दुग्ध क्षेत्र से जुड़े पक्षों के स्तर पर होने वाली प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

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