धान खरीद पर शाहाबाद मंडी में किसानों की बैठक, DC बोले- 20 सितंबर से खरीद की तैयारी; चढूनी ने बारदाना-पोर्टल का मुद्दा उठाया

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Haryana Paddy Procurement

कुरुक्षेत्र : हरियाणा में धान की सरकारी खरीद शुरू करने की तारीख को लेकर किसान संगठनों और सरकार के बीच बातचीत तेज हो गई है। 15 सितंबर से खरीद शुरू करने की मांग पूरी नहीं होने के बाद भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) ने मंगलवार को शाहाबाद की अनाज मंडी में किसानों की बैठक बुलाई। बैठक के दौरान कुरुक्षेत्र के DC विश्राम कुमार मीणा भी किसानों के बीच पहुंचे और खरीद से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की।

भाकियू की ओर से प्रशासन को बातचीत के लिए एक घंटे का समय दिया गया था। इसी दौरान DC विश्राम कुमार मीणा मंडी पहुंचे। उन्होंने किसानों को बताया कि धान खरीद के संबंध में केंद्र सरकार से बातचीत हुई है और प्रशासन भी आवश्यक तैयारियों को लेकर काम कर रहा है।

बैठक में भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने खरीद एजेंसियों की तैयारियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने मांग रखी कि खरीद एजेंसियां समय रहते बारदाना आढ़तियों तक पहुंचाएं, जिससे मंडियों में धान की खरीद शुरू होने पर किसी तरह की परेशानी न हो।

बातचीत के दौरान DC की ओर से 20 सितंबर से धान खरीद शुरू होने की बात कही गई। इस पर चढूनी ने तारीख को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि 20 सितंबर को अवकाश का दिन है तो उस दिन खरीद की प्रक्रिया किस तरह शुरू होगी। DC ने कहा कि सरकार की ओर से सकारात्मक आश्वासन मिला है और इस संबंध में तैयारियां की जा रही हैं।

किसानों ने मंडियों में धान सुखाने से जुड़ी परेशानी भी प्रशासन के सामने रखी। चढूनी ने कहा कि कई मंडियों में किसानों को धान सुखाने को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस पर DC ने संबंधित उच्चाधिकारियों से बातचीत करने का आश्वासन दिया।

किसान नेताओं का कहना है कि कई मंडियों में धान की आवक शुरू हो चुकी है, लेकिन सरकारी खरीद से जुड़ी व्यवस्थाएं अभी पूरी तरह तैयार नहीं दिखाई दे रही हैं। किसानों ने पोर्टल पर धान के सत्यापन में देरी का मुद्दा भी उठाया।

गुरनाम सिंह चढूनी ने आरोप लगाया कि किसानों की ओर से सरकार को लगातार समय दिए जाने के बावजूद खरीद की पूरी व्यवस्था समय पर तैयार नहीं की गई। उन्होंने कहा कि मिलरों के रजिस्ट्रेशन, पोर्टल, बारदाना और मिलिंग से जुड़ी प्रक्रिया पहले ही पूरी होनी चाहिए थी।

धान की सरकारी खरीद जल्द शुरू करने की मांग किसान संगठन पहले भी उठा चुके हैं। 10 सितंबर को पिहोवा अनाज मंडी में संयुक्त किसान मोर्चा की महापंचायत हुई थी। इसमें 15 सितंबर से धान की सरकारी खरीद शुरू करने की मांग प्रमुखता से रखी गई थी।

महापंचायत में धान की स्वीकार्य नमी की सीमा का मुद्दा भी उठा था। किसान संगठनों ने मौजूदा 17 प्रतिशत नमी की सीमा को बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने की मांग रखी है।

भाकियू पिहोवा के प्रवक्ता प्रिंस वडैच के अनुसार सीजन की शुरुआत में मंडी पहुंचने वाली धान में नमी अपेक्षाकृत अधिक रह सकती है। उनका कहना है कि 17 प्रतिशत की सीमा के कारण किसानों को फसल बेचने में परेशानी होती है, इसलिए इसे 20 प्रतिशत तक किया जाना चाहिए।

दूसरी ओर कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने 14 सितंबर को कुरुक्षेत्र में किसानों से धान की कटाई में जल्दबाजी नहीं करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि किसान फसल पूरी तरह पकने के बाद ही कटाई करें और निर्धारित नमी वाली धान मंडियों में लेकर आएं।

कृषि मंत्री के अनुसार सरकारी खरीद में धान के लिए 17 प्रतिशत नमी का मानक है। उन्होंने कहा था कि अधिक नमी होने पर खरीद और बाद की मिलिंग प्रक्रिया में परेशानी आती है। पूरी तरह पकी फसल मंडी में आने पर खरीद प्रक्रिया को सुचारु रखने में मदद मिलेगी।

पिछले वर्ष 2025 में भी धान खरीद की तारीख को लेकर किसान संगठनों ने मांग उठाई थी। उस समय सरकारी खरीद 22 सितंबर से शुरू हुई थी, जबकि इससे पहले एक अक्टूबर से खरीद शुरू करने की तैयारी थी।

फिलहाल किसान संगठनों की नजर सरकार की ओर से खरीद की तारीख और व्यवस्थाओं को लेकर जारी होने वाले अंतिम निर्देशों पर है। शाहाबाद में हुई बातचीत के दौरान प्रशासन ने सकारात्मक आश्वासन दिया है, जबकि किसान बारदाना, पोर्टल सत्यापन, मिलर रजिस्ट्रेशन और नमी की सीमा जैसे मुद्दों का समय रहते समाधान चाहते हैं।

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