करनाल : भाजपा विधायक जगमोहन आनंद और उनके बेटे को जान से मारने की धमकी देने के मामले में पुलिस ने एक रिटायर्ड स्कूल प्रिंसिपल को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने डाक के जरिए धमकी भरा पत्र भेजा था और उसमें खुद को लॉरेंस गैंग का एरिया कमांडर बताया था। आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।
मीडिया रिपोर्टों में आरोपी की पहचान को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में उसका नाम ईश्वर सिंह बताया गया है, जबकि अन्य प्रतिष्ठित रिपोर्टों में गुलाब सिंह/गुलाब मेहला नाम दिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपी से धमकी भरा पत्र भेजने के मकसद तथा किसी गैंग से संभावित संबंधों को लेकर पूछताछ की जा रही है।
विधायक जगमोहन आनंद के कैंप कार्यालय में अगस्त के आखिरी सप्ताह में डाक के जरिए धमकी भरा पत्र पहुंचा था। पत्र भेजने वाले ने खुद को लॉरेंस गैंग का कथित एरिया कमांडर बताते हुए विधायक और उनके बेटे को जान से मारने की धमकी दी थी।
धमकी मिलने के बाद विधायक ने पुलिस अधिकारियों को इसकी जानकारी दी थी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और विधायक की सुरक्षा भी बढ़ाई गई थी।
जांच के दौरान पुलिस का ध्यान उस स्थान पर गया, जहां से पत्र पोस्ट किया गया था। पुलिस के अनुसार धमकी भरा पत्र इंद्री क्षेत्र से पोस्ट किया गया था। इसके बाद आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई।
पुलिस जांच में सामने आया कि संदिग्ध व्यक्ति बाइक से पत्र पोस्ट करने पहुंचा था। CCTV फुटेज और बाइक से जुड़ी जानकारी के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंची। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया।
धमकी भरे पत्र में हर्ष और बीरबल की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत के घटनाक्रम का भी उल्लेख किया गया था। इसी कारण पुलिस यह भी जांच कर रही है कि पत्र भेजने के पीछे इस विवाद की कोई भूमिका थी या कोई अन्य कारण था।
करनाल में 5 अगस्त को बीरू वाल्मीकि की गोली मारकर हत्या हुई थी। पुलिस ने बाद में हर्ष और बीरबल को एक मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया था। पुलिस का कहना था कि दोनों बीरू की हत्या के मामले में शामिल थे।
इस मुठभेड़ के बाद रोड़ समाज के कुछ संगठनों ने पुलिस कार्रवाई की परिस्थितियों पर सवाल उठाए थे। समाज की ओर से स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर पंचायतें और प्रदर्शन भी किए गए। बाद में इस मामले की जांच स्टेट क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई थी।
विधायक जगमोहन आनंद के एक बयान को लेकर भी विवाद हुआ था। समाज के लोगों ने उनके बयान को मुठभेड़ के घटनाक्रम से जोड़ते हुए सवाल उठाए थे, जबकि विधायक ने स्पष्ट किया था कि उन्होंने बीरू वाल्मीकि के परिवार को केवल सख्त पुलिस कार्रवाई का आश्वासन दिया था और उन्हें किसी मुठभेड़ की पहले से जानकारी नहीं थी।
अब धमकी पत्र मामले में गिरफ्तार आरोपी को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजे जाने के बाद जांच का फोकस पत्र भेजने के वास्तविक मकसद पर है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपी ने गैंग का नाम केवल डर पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया या उसका वास्तव में किसी आपराधिक नेटवर्क से कोई संबंध है।
आरोपी के बेटे के कुछ राजनीतिक नेताओं के साथ संबंध होने की चर्चाएं भी सामने आई हैं। हालांकि किसी राजनीतिक व्यक्ति की धमकी पत्र की साजिश में भूमिका होने की पुलिस की ओर से पुष्टि नहीं की गई है। केवल तस्वीरों या सोशल मीडिया से जुड़े काम के आधार पर किसी व्यक्ति की इस मामले में संलिप्तता स्थापित नहीं होती।
पुलिस आरोपी से पूछताछ के साथ CCTV फुटेज, पत्र और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है। रिमांड के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि पत्र किस उद्देश्य से लिखा गया, गैंग का नाम क्यों इस्तेमाल किया गया और क्या इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति शामिल था।
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