अंबाला में 125 साल पुरानी वामन द्वादशी मेले की परंपरा का आगाज, पांच मंदिरों से निकलेंगे हिंडोले; तीन दिन होंगे धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम

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Ambala Vaman Dwadashi Mela

अंबाला : शहर में करीब 125 साल से चली आ रही ऐतिहासिक वामन द्वादशी मेले की परंपरा एक बार फिर जीवंत होने जा रही है। सनातन धर्म सभा की ओर से पुरानी अनाज मंडी में 21 से 23 सितंबर तक तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया जा रहा है। भगवान वामन के पांच हिंडोले, शोभायात्रा, भजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां इस आयोजन के प्रमुख आकर्षण रहेंगे।

मेले की सबसे खास परंपरा शहर के अलग-अलग मंदिरों से भगवान वामन के पांच हिंडोलों को शोभायात्रा के रूप में पुरानी अनाज मंडी तक लाने की है। यहां तैयार किए गए पंडाल में पांचों हिंडोलों को विराजमान किया जाएगा और श्रद्धालु तीन दिनों तक दर्शन कर सकेंगे।

सनातन धर्म सभा के प्रधान नरेश अग्रवाल के अनुसार 21 सितंबर को ठाकुरद्वारा मंदिर से शोभायात्रा के साथ मेले का शुभारंभ होगा। पूर्व मंत्री असीम गोयल ठाकुरद्वारा मंदिर से पहला हिंडोला उठाकर शोभायात्रा में शामिल होंगे। इसके बाद यात्रा शहर के प्रमुख बाजारों से गुजरते हुए आगे बढ़ेगी।

रास्ते में अन्य मंदिरों से आने वाले चार हिंडोले भी शोभायात्रा में शामिल होंगे। बैंड-बाजों और धार्मिक प्रस्तुतियों के साथ सभी हिंडोलों को पुरानी अनाज मंडी स्थित मेला परिसर तक पहुंचाया जाएगा।

वामन भगवान मंदिर के पुजारी कांति शर्मा के अनुसार अंबाला शहर में वामन द्वादशी मेला करीब 125 वर्षों से आयोजित होता आ रहा है। मेले की धार्मिक परंपरा के तहत पांच मंदिरों से भगवान के डोले लाकर एक स्थान पर विराजमान किए जाते हैं।

तीन दिवसीय आयोजन के पहले दिन धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी। 21 सितंबर की शाम आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। पंजाबी गायक गुलाब सिद्धू की प्रस्तुति भी कार्यक्रम का आकर्षण रहेगी।

22 सितंबर को सुबह से धार्मिक कार्यक्रम शुरू होंगे। इस दौरान भजन गायिका गौरा मणि अपनी प्रस्तुति देंगी। दूसरे दिन के कार्यक्रम में कृष्ण लाल बेदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

मेले के अंतिम दिन 23 सितंबर को पुरानी अनाज मंडी से भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें विभिन्न स्थानों से बुलाए गए बैंड और धार्मिक झांकियां शामिल होंगी। मेरठ से विशेष झांकियां भी मंगवाई गई हैं।

शोभायात्रा शहर के प्रमुख बाजारों से होते हुए आगे बढ़ेगी। इसके बाद भगवान वामन के पांचों हिंडोलों को तालाब तक ले जाकर परंपरागत जलक्रीड़ा की धार्मिक रस्म निभाई जाएगी। धार्मिक अनुष्ठान पूरा होने के बाद सभी हिंडोलों को वापस उनके संबंधित मंदिरों में स्थापित किया जाएगा।

आयोजकों के अनुसार मेले में अंबाला शहर के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। आयोजन को लेकर सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भी व्यवस्थाएं की गई हैं।

वामन द्वादशी मेला धार्मिक आस्था के साथ अंबाला की पुरानी सांस्कृतिक परंपरा से भी जुड़ा हुआ है। पांच हिंडोलों की शोभायात्रा और तीन दिन तक चलने वाले धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों के कारण इस बार भी मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

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