₹370 बिरयानी विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, कॉमेडियन प्रणित मोरे की याचिका पर केंद्र समेत हरियाणा-महाराष्ट्र से जवाब तलब

4
Pranit More

नई दिल्ली/गुरुग्राम : गुरुग्राम में हुए एक स्टैंड-अप कॉमेडी शो से जुड़े चर्चित ‘₹370 बिरयानी’ विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने कॉमेडियन प्रणित मोरे की याचिका पर केंद्र सरकार के साथ हरियाणा और महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है। मोरे ने एक ही घटना को लेकर अलग-अलग राज्यों में दर्ज दो एफआईआर को एक साथ जोड़ने की मांग की है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सोमवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। मोरे की ओर से अदालत को बताया गया कि दोनों एफआईआर एक ही घटनाक्रम से जुड़ी हैं और वह चाहते हैं कि गुरुग्राम में दर्ज एफआईआर को महाराष्ट्र में पहले से दर्ज मामले के साथ जोड़ दिया जाए।

मोरे के वकील ने अदालत में कहा कि कॉमेडियन इस मामले को लेकर विभिन्न मंचों पर माफी मांग चुके हैं और मुकदमे का सामना करने के लिए तैयार हैं। उनका आग्रह केवल दोनों एफआईआर को एक साथ किए जाने को लेकर है।

वकील की ओर से यह भी कहा गया कि विवाद की गंभीरता का पता चलने के बाद संबंधित वीडियो को हटा दिया गया था। मोरे की ओर से अदालत में यह पक्ष रखा गया कि वह शो के होस्ट थे और सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किए जाने को लेकर भी परिस्थितियां अलग थीं।

पूरा विवाद गुरुग्राम में आयोजित एक स्टैंड-अप कॉमेडी शो से शुरू हुआ था। शो के दौरान दर्शकों में मौजूद हिमांशु जांगड़ा ने एक महिला के साथ डेट पर जाने का अनुभव साझा करते हुए करीब 370 रुपए की बिरयानी पर खर्च करने का जिक्र किया था।

इसके बाद उसने खर्च की गई रकम के बदले महिला से शारीरिक नजदीकी की अपेक्षा से जुड़ी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस बातचीत का वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और सहमति तथा महिलाओं के प्रति व्यवहार को लेकर इसकी व्यापक आलोचना हुई।

प्रणित मोरे पर आरोप लगा कि शो के होस्ट के तौर पर उन्होंने उस टिप्पणी पर तत्काल आपत्ति नहीं जताई। विवाद बढ़ने के बाद मोरे ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी।

मामले में महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने मोरे, हिमांशु जांगड़ा और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद गुरुग्राम में भी संबंधित मामले को लेकर दूसरी एफआईआर दर्ज की गई। अब मोरे ने दोनों मामलों को एक साथ जोड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया था। आयोग ने शो में हुई बातचीत और महिलाओं की सहमति से जुड़े पहलुओं पर आपत्ति जताते हुए संबंधित लोगों को तलब किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल एफआईआर में लगाए गए आरोपों के गुण-दोष पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। मौजूदा कार्यवाही मोरे की दोनों एफआईआर को एक साथ जोड़ने की मांग वाली याचिका से संबंधित है।

अब केंद्र सरकार के साथ हरियाणा और महाराष्ट्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट के नोटिस पर अपना पक्ष रखना है। इसके बाद अदालत मोरे की एफआईआर क्लब करने की मांग पर आगे विचार करेगी।

Loading