गुरुग्राम-नूंह में पैरेलल बिजली लाइसेंस पर विवाद हाईकोर्ट पहुंचा, HERC को 28 सितंबर को इंजीनियर्स एसोसिएशन का पक्ष सुनने के निर्देश

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चंडीगढ़ : गुरुग्राम और नूंह में प्रस्तावित पैरेलल बिजली वितरण लाइसेंस को लेकर चल रहे विवाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति त्रिभुवन दहिया की अदालत ने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) को 28 सितंबर 2026 को एसोसिएशन की आपत्तियों और पक्ष को सुनने के निर्देश दिए हैं।

एसोसिएशन ने प्रस्तावित पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसिंग प्रक्रिया को लेकर कई आपत्तियां उठाई हैं। मामला मैसर्स इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड की ओर से गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली वितरण के लिए मांगे गए पैरेलल लाइसेंस से जुड़ा है।

हाईकोर्ट ने एसोसिएशन को पहले दाखिल की गई आपत्तियों के अलावा आवश्यक अतिरिक्त दस्तावेज और अन्य आपत्तियां भी आयोग के समक्ष रखने की छूट दी है। एसोसिएशन का कहना है कि आवेदक कंपनी की ओर से HERC के समक्ष जमा कराए गए अतिरिक्त दस्तावेजों की प्रतियां भी उसे उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि वह सुनवाई में अपना पक्ष प्रभावी तरीके से रख सके।

HERC की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति पहले इलेवन पावर की लाइसेंस याचिका का परीक्षण कर चुकी है। समिति ने कुछ शर्तों के साथ पैरेलल वितरण लाइसेंस देने पर विचार किए जाने की सिफारिश की थी। यह सिफारिश अंतिम निर्णय नहीं है और लाइसेंस पर अंतिम फैसला नियामक प्रक्रिया पूरी होने के बाद HERC को करना है।

हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन इस प्रस्ताव का विरोध कर रही है। एसोसिएशन के महासचिव इंजीनियर रविंद्र घणघस का कहना है कि बिजली वितरण व्यवस्था की तुलना टेलीकॉम क्षेत्र से करना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि बिजली आपूर्ति के लिए खंभे, तार, ट्रांसफार्मर और अन्य बुनियादी ढांचा तैयार करना पड़ता है। ऐसे में एक ही क्षेत्र में समानांतर नेटवर्क के व्यावहारिक और आर्थिक प्रभावों का विस्तृत अध्ययन जरूरी है।

एसोसिएशन ने सरकारी बिजली वितरण कंपनी दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) पर पड़ने वाले संभावित वित्तीय प्रभाव को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उसका कहना है कि गुरुग्राम और नूंह से निगम को महत्वपूर्ण राजस्व मिलता है। यदि अधिक राजस्व देने वाले उपभोक्ताओं का एक हिस्सा दूसरी कंपनी की ओर जाता है तो इसका असर मौजूदा वितरण कंपनी की आय और क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था पर पड़ सकता है।

हालांकि ये एसोसिएशन की ओर से उठाई गई आपत्तियां और आशंकाएं हैं। प्रस्तावित लाइसेंस के वास्तविक वित्तीय, परिचालन और उपभोक्ता प्रभावों का निर्धारण नियामक प्रक्रिया और HERC के अंतिम निर्णय के आधार पर होगा।

एसोसिएशन ने यह तर्क भी दिया है कि हरियाणा की मौजूदा सरकारी बिजली वितरण कंपनियों के प्रदर्शन और उनके नेटवर्क को ध्यान में रखते हुए किसी नई समानांतर व्यवस्था की जरूरत, लागत और दीर्घकालिक प्रभावों का विस्तृत आकलन किया जाना चाहिए।

इस मुद्दे पर बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के संगठनों की ओर से पहले भी विरोध दर्ज कराया जा चुका है। HERC ने विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर संबंधित पक्षों से टिप्पणियां, सुझाव और आपत्तियां मांगी थीं। अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद इंजीनियर्स एसोसिएशन को भी अपना पक्ष और अतिरिक्त सामग्री आयोग के सामने रखने का अवसर मिलेगा।

हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष इंजीनियर पुनीत कुंडू के अनुसार संगठन इस मुद्दे को लेकर किसानों, औद्योगिक संगठनों, बिजली उपभोक्ताओं और अन्य वर्गों से संपर्क कर रहा है। संगठन का कहना है कि प्रस्तावित व्यवस्था के संभावित प्रभावों के बारे में लोगों को जानकारी दी जाएगी।

फिलहाल पैरेलल बिजली वितरण लाइसेंस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। आगे की नियामक प्रक्रिया में संबंधित पक्षों की आपत्तियों और दस्तावेजों पर विचार किया जाएगा। इसके बाद HERC कानून और लागू नियमों के तहत लाइसेंस आवेदन पर निर्णय करेगा।

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