चंडीगढ़ : हरियाणा में आने वाले दिनों में मौसम करवट ले सकता है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 26 सितंबर के आसपास प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम में बदलाव देखने को मिलने की संभावना है। इस दौरान बादल छाने के साथ कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। मौसम में बदलाव के बाद रात के तापमान में भी गिरावट आने के आसार हैं।
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार 26 सितंबर से प्रदेश में बादलों की आवाजाही बढ़ सकती है। इसके बाद अलग-अलग दिनों में कुछ स्थानों पर बारिश की संभावना बनी हुई है। खासकर राजस्थान की सीमा से लगते सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी, रेवाड़ी और नारनौल क्षेत्र में मौसम के बदलाव का असर देखने को मिल सकता है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के ताजा पूर्वानुमान में भी हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली क्षेत्र में 26 से 28 सितंबर के दौरान कहीं-कहीं बारिश की संभावना जताई गई है। हालांकि फिलहाल प्रदेश के लिए किसी बड़े स्तर की मौसम चेतावनी जारी नहीं की गई है।
मौजूदा समय में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में दिन के समय गर्मी बनी हुई है। राजस्थान क्षेत्र में बने प्रति-चक्रवातीय परिसंचरण और पश्चिमी दिशा से आ रही शुष्क एवं गर्म हवाओं के प्रभाव से दिन के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
आसमान साफ रहने के कारण तेज धूप सीधे जमीन तक पहुंच रही है। इसी वजह से कई इलाकों में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास या इससे ऊपर बना हुआ है। दूसरी तरफ रात के समय मौसम में हल्की ठंडक महसूस होने लगी है।
मानसून की वापसी की प्रक्रिया के साथ हवा में नमी के स्तर में बदलाव और रात में जमीन से गर्मी तेजी से निकलने के कारण न्यूनतम तापमान में धीरे-धीरे कमी आ सकती है। मौसम विज्ञान में इस प्रक्रिया को रेडिएटिव कूलिंग कहा जाता है। इसी कारण दिन गर्म रहने के बावजूद देर रात और सुबह के समय मौसम अपेक्षाकृत सुहावना महसूस हो सकता है।
आगामी मौसम को देखते हुए किसानों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। बारिश की संभावना वाले क्षेत्रों में सिंचाई और कीटनाशकों के छिड़काव की योजना मौसम पूर्वानुमान को देखकर बनाने की सलाह दी जा रही है। बारिश या तेज हवा की संभावना के दौरान कीटनाशकों का छिड़काव करने से उनका प्रभाव कम हो सकता है।
कपास उत्पादक किसानों को फसल में सफेद मक्खी और गुलाबी सुंडी की नियमित निगरानी करने की सलाह है। किसी भी कीटनाशक का इस्तेमाल आवश्यकता और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार मौसम साफ रहने पर करना बेहतर होगा।
धान उत्पादक किसान भी फसल में तना छेदक और लीफ रोलर जैसे कीटों की निगरानी करते रहें। खेतों में आवश्यकता से अधिक पानी जमा रखने से बचने और आगामी बारिश को ध्यान में रखकर सिंचाई प्रबंधन करने की सलाह दी गई है।
मौसम प्रणाली में बदलाव के साथ अगले कुछ दिनों में पूर्वानुमान भी बदल सकता है। ऐसे में किसानों और आम लोगों को स्थानीय स्तर पर जारी होने वाले ताजा मौसम बुलेटिन पर नजर रखने की जरूरत है।
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