घरौंडा में जिंक सल्फेट का सैंपल फेल, जांच में पोषक तत्व ‘जीरो’ मिलने का दावा; डीलर और निर्माता पक्ष पर केस

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Gharaunda Zinc Sulphate Sample

करनाल : घरौंडा की नई अनाज मंडी स्थित एक फर्म से लिए गए जिंक सल्फेट मोनोहाइड्रेट 33 प्रतिशत के सैंपल के प्रयोगशाला परीक्षण में पोषक तत्वों की मात्रा शून्य मिलने का मामला सामने आया है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की शिकायत पर घरौंडा थाना पुलिस ने संबंधित डीलर और निर्माता कंपनी के जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग करनाल के सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी अनिल चौहान ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 4 जून 2026 को नई अनाज मंडी घरौंडा की शॉप नंबर 169 स्थित मैसर्स श्री श्याम जी इंटरप्राइजेज से जिंक सल्फेट मोनोहाइड्रेट 33 प्रतिशत का सैंपल लिया गया था।

विभाग के मुताबिक उत्पाद पर निर्माण तिथि 2 मार्च 2026 और समाप्ति तिथि 1 मार्च 2029 अंकित थी। यह उत्पाद तेलंगाना के हैदराबाद क्षेत्र स्थित एम/एस श्रीकर बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित बताया गया। निरीक्षण के समय संबंधित उत्पाद के 5-5 किलोग्राम के 20 पैकेट स्टॉक में मौजूद होने की जानकारी दी गई है।

कृषि विभाग के अधिकारी ने सतीश कुमार की मौजूदगी में उत्पाद का सैंपल लेकर उसे नियमानुसार सील किया। इसके बाद नमूने को जांच के लिए गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला, रोहतक भेजा गया।

विभागीय शिकायत के अनुसार सैंपल 8 जून को प्रयोगशाला भेजा गया था और 22 जून को इसकी जांच रिपोर्ट जारी हुई। कृषि विभाग का दावा है कि रिपोर्ट में संबंधित पोषक तत्व की मात्रा शून्य पाई गई, जिसके आधार पर सैंपल को निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं माना गया।

रिपोर्ट मिलने के बाद उप निदेशक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग करनाल की ओर से 1 जुलाई को संबंधित डीलर, फर्म और निर्माता कंपनी के जिम्मेदार व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।

विभाग के अनुसार नोटिस का जवाब निर्माता कंपनी की ओर से 18 जुलाई 2026 को दिया गया, लेकिन अधिकारियों ने जवाब को संतोषजनक नहीं माना। इसके बाद मामले में आगे की विभागीय और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।

शिकायत में कृषि निदेशक हरियाणा के पुराने विभागीय निर्देशों का भी हवाला दिया गया है। विभाग का कहना है कि किसी उर्वरक के नमूने में आवश्यक पोषक तत्व की मात्रा शून्य मिलने या उत्पाद के नकली पाए जाने की स्थिति में संबंधित डीलर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का प्रावधान है।

कृषि विभाग ने शिकायत में आरोप लगाया कि जिंक सल्फेट मोनोहाइड्रेट 33 प्रतिशत के नाम से ऐसा उत्पाद बिक्री के लिए रखा गया, जिसके सैंपल में जांच के दौरान पोषक तत्व की मात्रा शून्य पाई गई। विभाग ने इसे किसानों के हितों से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए संबंधित पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

घरौंडा थाना पुलिस ने 22 सितंबर को शिकायत और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया। पुलिस ने आवश्यक वस्तु अधिनियम और उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई शुरू की है।

मामले की जांच एसआई ऊमेश कुमार कर रहे हैं। पुलिस अब विभाग से मिले दस्तावेजों, लैब रिपोर्ट, संबंधित स्टॉक और अन्य रिकॉर्ड की जांच करेगी। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगी।

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