पानीपत में फर्जी कस्टम अधिकारी बनकर ₹1.27 लाख की ठगी, पार्सल में अवैध सामान बताकर गिरफ्तारी का दिखाया डर

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Panipat Cyber Fraud

पानीपत : अमेरिका से आने वाले पार्सल की क्लीयरेंस के नाम पर फर्जी कस्टम अधिकारी बनकर एक युवक से 1 लाख 27 हजार रुपए की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। आरोपियों ने पार्सल में कीमती और कथित अवैध सामान होने की बात कहकर युवक को कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाया। पीड़ित की शिकायत पर साइबर थाना पानीपत पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जौरासी रोड, करहंस निवासी अमित कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि अमेरिका से उसका एक कूरियर पार्सल आना था। शिकायत के मुताबिक पार्सल में मोबाइल, ज्वेलरी और जूते समेत अन्य सामान भेजे जाने की बात कही गई थी।

अमित के अनुसार पार्सल कूरियर किए जाने के करीब दो दिन बाद उसे भेजने वाले व्यक्ति से उसका संपर्क अचानक बंद हो गया। इसी दौरान उसके मोबाइल पर कुछ अनजान नंबरों से कॉल आने लगीं।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को कस्टम विभाग का अधिकारी बताया। उसने कहा कि अमेरिका से आया उसका पार्सल कस्टम विभाग के पास रुका हुआ है और उसमें कीमती अथवा कथित तौर पर अवैध सामान मिला है।

आरोप है कि कॉल करने वाले ने युवक को कानूनी कार्रवाई में फंसाने और जेल भेजने का डर दिखाया। लगातार डराए जाने के कारण युवक आरोपियों की बातों में आ गया।

शिकायत के मुताबिक कथित कस्टम अधिकारी ने मामले को निपटाने और पार्सल की क्लीयरेंस कराने के नाम पर पैसे जमा कराने के लिए कहा। पीड़ित ने आरोपियों की ओर से बताए गए खातों में अलग-अलग समय पर कुल 1 लाख 27 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए।

रकम भेजने के बावजूद युवक को पार्सल नहीं मिला। आरोपियों की ओर से कथित तौर पर और पैसे मांगे जाने लगे। इसके बाद अमित को संदेह हुआ और उसे अपने साथ साइबर धोखाधड़ी होने का पता चला।

पीड़ित ने मामले की शिकायत साइबर थाना पानीपत पुलिस को दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस अब उन मोबाइल नंबरों और बैंक खातों से जुड़ी जानकारी जुटा रही है, जिनका इस्तेमाल कथित ठगी में किया गया। ट्रांजेक्शन से संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है, ताकि रकम किस खाते में गई और वहां से आगे कहां ट्रांसफर हुई, इसका पता लगाया जा सके।

साइबर ठगी के ऐसे मामलों में अपराधी अक्सर खुद को कस्टम, पुलिस या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ित पर दबाव बनाते हैं। गिरफ्तारी अथवा कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर तत्काल पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा जाता है।

फिलहाल साइबर थाना पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। संदिग्ध मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।

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