पूर्व विधायक शिव शंकर भारद्वाज को मतदाता सूची में नहीं मिला अपना नाम, दोबारा जुड़वाने की प्रक्रिया जारी

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Bhiwani News

भिवानी के पूर्व कांग्रेस विधायक डॉ. शिव शंकर भारद्वाज ने कहा है कि इस बार मतदाता सूची में उन्हें अपना नाम नहीं मिला। नाम जुड़वाने के लिए उन्हें करीब एक सप्ताह तक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) से संपर्क करना पड़ा और दस्तावेज जमा कराने पड़े। उनके मुताबिक, प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। नई सूची आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि उनका नाम उसमें दर्ज हुआ है या नहीं।

भारद्वाज ने बताया कि 2002 की मतदाता सूची में उनकी मां का नाम मिलने के बाद उनका आवेदन आगे बढ़ा। उन्होंने बीएलओ को पासपोर्ट की प्रति, जन्मतिथि का प्रमाण और अन्य जरूरी दस्तावेज दिए हैं। उनका कहना है कि वे पहले कई विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं, इसलिए अपना नाम सूची में नहीं मिलने पर उन्हें हैरानी हुई।

पूर्व विधायक ने सवाल उठाया कि पुराने चुनावी रिकॉर्ड के बावजूद उनके मामले में 2002 की मतदाता सूची को आधार बनाने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का आरोप लगाते हुए इसकी वजह स्पष्ट करने की मांग की। यह उनका दावा है; उनके नाम के सूची में न मिलने का कारण और आवेदन की स्थिति संबंधित चुनाव अधिकारियों से स्पष्ट होना बाकी है।

भारद्वाज 2005 में भिवानी विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीते थे और विधायक रहे। उन्होंने बताया कि 1996 में भी उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ा था। इसके बाद 2009 में कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरे और दूसरे स्थान पर रहे। 2014 में उन्होंने हरियाणा जन चेतना पार्टी (वर्धमान) तथा 2019 में जननायक जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा।

उन्होंने कहा कि वर्षों से चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के बावजूद इस बार नाम दोबारा दर्ज कराने में उन्हें परेशानी हुई। फिलहाल उन्होंने आवश्यक कागजात जमा करा दिए हैं और आगे की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। उनके आवेदन का परिणाम तथा मतदाता सूची में नाम की अंतिम स्थिति संशोधित सूची जारी होने पर ही सामने आएगी।

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