करनाल अनाज मंडी में धान की आवक बढ़ने के बीच किसानों ने खरीद व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सरकारी खरीद एजेंसियों के अधिकारी ढेरियों पर नहीं पहुंच रहे और उन्हें मजबूरी में निजी खरीदारों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम भाव पर फसल बेचनी पड़ रही है। वहीं, मंडी प्रशासन का कहना है कि खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है।
किसान पंकज और राममेहर ने आरोप लगाया कि उन्हें धान का भाव एमएसपी से 300 से 400 रुपये प्रति क्विंटल तक कम मिल रहा है। किसानों के मुताबिक, कई दिनों से फसल मंडी में पड़ी है और सीमित खरीदार अपनी मर्जी से कीमत तय कर रहे हैं।
पंकज ने बताया कि उसकी धान 2,170 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिकी, जबकि उसने एमएसपी 2,441 रुपये बताया। उसका कहना है कि वह सुबह पांच बजे फसल लेकर मंडी पहुंचा था, लेकिन खरीद संबंधी परेशानी का समाधान नहीं हुआ। उसने मंडी में करीब चार निजी खरीदारों की सक्रियता और सरकारी खरीद में देरी का आरोप लगाया।
किसानों ने भुगतान प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि धान कम भाव पर बिकने के बावजूद खाते में एमएसपी के अनुसार भुगतान दिखाया जाता है और बाद में आढ़ती अंतर की रकम वापस मांगता है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कुछ किसानों का कहना है कि धान में अधिक नमी बताकर कम भाव लगाया जा रहा है। एक किसान ने बताया कि बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद में वह कम भाव पर बेचने के बजाय पहले अपनी धान सुखाएगा।
मंडी रिकॉर्ड के अनुसार, करनाल अनाज मंडी में अब तक 1.14 लाख क्विंटल पीआर धान पहुंची है। इसमें 35 हजार क्विंटल की निजी खरीद और 30 हजार क्विंटल की सरकारी खरीद हुई है।
मंडी सचिव विकास गुप्ता ने कहा कि तीन सरकारी एजेंसियों को दुकानों के अनुसार शेड आवंटित किए गए हैं। गेट पास प्रक्रिया की निगरानी की जा रही है। उन्होंने शिकायत मिलने पर जांच कराने की बात कही है।
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