रोहतक, हरियाणा। वर्ष 2016 के जाट आरक्षण आंदोलन से जुड़े एक हत्या मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे रोहतक के पवन उर्फ पोना को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उसकी आजीवन कारावास की सजा रद्द कर दी है। हालांकि इस कानूनी राहत तक पहुंचने में पवन को अपने जीवन के दस वर्ष से अधिक समय जेल में बिताना पड़ा।
हिसार बाइपास का रहने वाला है पवन
पवन उर्फ पोना रोहतक के हिसार बाइपास क्षेत्र का निवासी है। वर्ष 2016 में हरियाणा में हुए जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान वह भी आंदोलन में शामिल हुआ था। उस समय प्रदेश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन और तनावपूर्ण परिस्थितियां बनी हुई थीं।
जानकारी के अनुसार, रोहतक के जसिया गांव में जाट आरक्षण की मांग को लेकर धरना चल रहा था। इसी दौरान हांसी के आसपास दंगे होने की सूचना मिली। इसके बाद पवन अपने कुछ दोस्तों के साथ उस क्षेत्र में पहुंच गया।
आंदोलन के दौरान हुई घटना में दर्ज हुआ हत्या का मामला
बताया गया है कि हांसी के पास पहुंचने के बाद एक घटना हुई, जिसके संबंध में पवन उर्फ पोना के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया। इस मामले में पवन के अलावा अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया था।
बाद में मामले में पवन को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इसके चलते उसे लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा। पवन अपनी सजा के खिलाफ न्यायिक राहत की उम्मीद लगाए हुए था।
हाई कोर्ट ने रद्द की आजीवन कारावास की सजा
अब हाई कोर्ट ने मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पवन की उम्रकैद की सजा निरस्त कर दी है। इस निर्णय से उसे लंबे समय बाद बड़ी कानूनी राहत मिली है।
हालांकि उपलब्ध जानकारी में अदालत के विस्तृत आदेश और सजा रद्द करने के कानूनी आधार का उल्लेख नहीं है। इसलिए फैसले के अन्य पहलुओं की पुष्टि आदेश की प्रति से ही हो सकेगी।
दस साल से अधिक समय जेल में बिताया
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू पवन का जेल में बिताया लंबा समय है। वर्ष 2016 के आंदोलन से जुड़े मामले में सजा पाने के बाद उसने दस वर्ष से अधिक समय कारावास में बिताया।
हाई कोर्ट के फैसले ने एक बार फिर लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रियाओं और उनके प्रभाव को चर्चा में ला दिया है।
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