हिसार/झज्जर, हरियाणा। वर्ष 2016 के जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मामले में दलजीत सिहाग सिसाय को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद झज्जर जेल से रिहा कर दिया गया। उनकी रिहाई की जानकारी मिलते ही जाट समाज के लोग और समर्थक उन्हें लेने जेल पहुंचे। इस मामले में लंबे समय से कानूनी लड़ाई चल रही थी।
हांसी में युवक की हत्या से जुड़ा मामला
वर्ष 2016 में हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान कई स्थानों पर हिंसक घटनाएं हुई थीं। इसी दौरान हांसी क्षेत्र में मिंटू नामक युवक की हत्या हो गई थी। दलजीत सिहाग सिसाय का नाम इस मामले से जुड़ा था।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद दलजीत की रिहाई का रास्ता साफ हुआ। हालांकि अदालत के विस्तृत आदेश और राहत के कानूनी आधार की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
वकील ने बताया संघर्ष की जीत
दलजीत के अधिवक्ता जगपाल ने हाईकोर्ट से मिली राहत को लंबे संघर्ष की जीत बताया। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से दलजीत को राहत मिली है।
रिहाई के दौरान झज्जर जेल के बाहर जाट समाज के लोग भी मौजूद रहे।
पत्नी अनीता सिसाय ने लड़ी लंबी लड़ाई
दलजीत की रिहाई के लिए उनकी पत्नी अनीता सिसाय ने लंबे समय तक कानूनी और सामाजिक स्तर पर प्रयास किए। बताया गया है कि अनीता ने विभिन्न खाप पंचायतों और सामाजिक मंचों पर जाकर अपने पति का मामला उठाया।
परिवार की ओर से लगातार किए गए प्रयासों के बाद हाईकोर्ट से मिली राहत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बेड़ियां पहनाकर बाजार में घुमाने का मामला भी चर्चा में रहा
दलजीत सिहाग उस समय भी चर्चा में आए थे, जब 20 नवंबर 2025 को तत्कालीन डीजीपी ओपी सिंह के आदेश पर हांसी पुलिस ने उन्हें बेड़ियां पहनाकर बाजार में घुमाया था।
उस दौरान पुलिस ने दावा किया था कि दलजीत फिरौती, लूटपाट, जानलेवा हमला और हत्या के प्रयास सहित 61 मामलों में वांछित रहा है।
फिलहाल हाईकोर्ट से मिली राहत के बाद दलजीत की जेल से रिहाई हुई है। यह राहत अन्य मामलों में लगे आरोपों के स्वतः समाप्त होने का प्रमाण नहीं है।
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