“विदेशी तार जुड़े घोटाले में बड़ा पर्दाफाश: सैकड़ों शेल कम्पनी के जाल पर CBI का शिकंजा”

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CBI fraud-₹1000 crore scam

सीबीआई ने ₹1,000 करोड़ के धोखे में चीन लिंक और 111 नकली कंपनियों का खुलासा; चार्जशीट दायर

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने वित्तीय धोखाधड़ी के एक बहु-राज्यीय मामले में नया बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि लगभग ₹1,000 करोड़ के लेन-देन को लेकर चल रहे घोटाले में एक जटिल नेटवर्क—जिसमें 111 फर्जी कंपनियाँ और विदेशी लिंक शामिल थे—का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर प्राथमिक खोज-तत्त्व सार्वजनिक किए हैं।

CBI के अनुसार, फर्जी कंपनियों के हवाले से बनाए गए बैंक खातों, ठसे हुए बिलों और कालाबाजारी किए गए बही-खातों के जरिये धन का बहिर्वाह और भेदभावपूर्ण लाभ सृजित किया गया। जांच में यह भी पता चला कि रकम के कुछ हिस्से का हब-रूट चीन से जुड़े कनैक्शन के माध्यम से विदेशी ठिकानों तक पहुंचा—यह कड़ी प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है कि क्या अंतरराष्ट्रीय इकाइयों को जाल में सक्रिय रूप से जोड़ा गया था।

चार्जशीट में आरोपियों पर धोखाधड़ी, मनी-लॉन्ड्रिंग, बैंक धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित कई धाराएँ लगाई गई हैं। सीबीआई ने घटनाक्रम का नक्शा तैयार करते हुए दिखाया है कि किस तरह डेढ़ दर्जन से अधिक व्यक्तियों और संस्थाओं ने परस्पर समन्वित रूप से व्यवहार कर बैंकिंग चैनलों का दुरुपयोग किया।

अधिकारियों ने बताया कि प्रारम्भिक वैधानिक कार्रवाई के दौरान दस्तावेज़, डिजिटल ट्रेल, बैंक रेकॉर्ड और विदेश कनेक्शन के सबूत जुटाए गए। अब एजेंसी विदेशी साझेदारों से सहयोग की प्रक्रिया शुरू कर रही है और अंतरराष्ट्रीय जांच सहयोग के माध्यम से और सबूत जुटाने का दावा कर रही है।

यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि बड़े पैमाने पर वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए राष्ट्रीय-स्तरीय निगरानी, बैंकिंग साझेदारी और पारदर्शिता कदम आवश्यक हैं। सीबीआई ने जनता और प्रभावित पक्षों को आश्वस्त किया है कि आरोपियों के संपत्तियों की जब्ती और फंड-वापसी की प्रक्रियाएँ भी आगे चल कर की जाएंगी। मामले की आगामी सुनवाई और जांच के अगले चरणों से और खुलासे होने की उम्मीद है।

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