स्कैन के बाद दिखा भुगतान पूरा, लेकिन खाते तक नहीं पहुंची रकम
डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन के बीच साइबर अपराधियों ने ठगी का एक नया तरीका अपनाया है, जिससे छोटे व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। हाल ही में सामने आए एक मामले में नकली मोबाइल एप के जरिए भुगतान सफल दिखाकर दुकानदार को धोखा दिया गया। घटना उस समय हुई, जब एक ग्राहक ने वस्त्र खरीदने के बाद क्यूआर कोड स्कैन कर भुगतान किया और स्क्रीन पर ट्रांजैक्शन पूरा होने का संदेश भी दिखाया, लेकिन वास्तविक खाते में पैसा जमा नहीं हुआ।
दुकानदार के अनुसार, ग्राहक ने बड़ी सहजता से मोबाइल फोन पर स्कैन किया और कुछ ही सेकंड में “पेमेंट सक्सेसफुल” का स्क्रीनशॉट भी दिखा दिया। भरोसे में आकर व्यापारी ने सामान सौंप दिया। बाद में जब खाते की जांच की गई, तो पता चला कि कोई राशि प्राप्त ही नहीं हुई। जांच में सामने आया कि भुगतान के लिए इस्तेमाल किया गया एप असली नहीं था, बल्कि एक डमी सॉफ्टवेयर था, जो केवल नकली पुष्टि संदेश दिखाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के फर्जी एप्स दिखने में बिल्कुल असली भुगतान प्लेटफॉर्म जैसे होते हैं। आम दुकानदार के लिए तुरंत पहचान कर पाना मुश्किल हो जाता है, खासकर जब भीड़ या जल्दबाजी की स्थिति हो। साइबर अपराधी इसी कमजोरी का फायदा उठाकर वारदात को अंजाम देते हैं।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, ताकि आरोपी की पहचान की जा सके। साइबर सेल भी यह पता लगाने में जुटी है कि इस तरह के फर्जी एप कहां से डाउनलोड किए जा रहे हैं और इनके पीछे कौन सा गिरोह सक्रिय है।
प्रशासन और साइबर विशेषज्ञों ने व्यापारियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। भुगतान स्वीकार करते समय केवल ग्राहक के फोन पर दिख रहे संदेश पर भरोसा न करें, बल्कि अपने खाते या आधिकारिक नोटिफिकेशन में रकम आने की पुष्टि जरूर करें। डिजिटल लेन-देन में थोड़ी सी सतर्कता बड़े नुकसान से बचा सकती है।
![]()











