पशु मेले में रिकॉर्डधारी नंदी, कद-काठी और वंश ने बटोरी सुर्खियां
पशुपालन और देसी नस्लों के संरक्षण को बढ़ावा देने वाले एक बड़े आयोजन में इस बार एक अनोखा आकर्षण देखने को मिला। मेले में पहुंचे एक विशालकाय नंदी ने अपने आकार, वजन और वंश से जुड़ी उपलब्धियों के कारण सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। करीब दस फीट लंबे और लगभग डेढ़ टन वजन वाले इस नंदी को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पशुपालक, विशेषज्ञ और आम दर्शक इसके साथ तस्वीरें खिंचवाते नजर आए।
इस नंदी की खासियत केवल उसका विशाल शरीर ही नहीं, बल्कि उसकी प्रजनन क्षमता भी है। जानकारी के अनुसार, इसके सीमेन का उपयोग देश के अलग-अलग हिस्सों में किया गया, जिससे अब तक हजारों स्वस्थ बछड़ों का जन्म हो चुका है। पशु विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सशक्त और शुद्ध नस्ल के पशु देसी पशुधन की गुणवत्ता सुधारने में अहम भूमिका निभाते हैं।
नंदी की पारिवारिक पृष्ठभूमि भी कम दिलचस्प नहीं है। बताया गया कि इसकी माता ने अपने समय में दुग्ध उत्पादन का एक उल्लेखनीय रिकॉर्ड बनाया था। एक दिन में दर्जनों लीटर दूध देने वाली गाय के रूप में उसकी पहचान रही, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बेहतर नस्ल और सही देखभाल का असर पीढ़ियों तक दिखाई देता है। यही कारण है कि यह नंदी आज पशुपालन क्षेत्र में एक मिसाल बन चुका है।
मेले में पहुंचे पशुपालकों ने बताया कि ऐसे आयोजनों से उन्हें नई जानकारी, आधुनिक तकनीक और बेहतर नस्लों के बारे में सीखने का मौका मिलता है। वहीं, युवाओं में भी पशुपालन को लेकर उत्सुकता बढ़ रही है। विशेषज्ञों ने कहा कि अगर वैज्ञानिक तरीके से पालन-पोषण किया जाए, तो पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का बड़ा साधन बन सकता है।
कुल मिलाकर, यह विशालकाय नंदी न केवल मेले की शान बना, बल्कि पशुपालन की संभावनाओं और देसी नस्लों की ताकत का जीवंत उदाहरण भी पेश करता नजर आया।
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