चंडीगढ़ नगर निगम में विपक्ष बिखरा, सत्ताधारी दल को बढ़त

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Chandigarh Mayor election

मेयर चुनाव में AAP-कांग्रेस की राहें जुदा, बीजेपी मजबूत स्थिति में

चंडीगढ़ मेयर चुनाव को लेकर राजनीतिक तस्वीर लगभग साफ हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने कांग्रेस के साथ किसी भी तरह के गठबंधन से साफ इनकार कर दिया है। पार्टी के प्रभारी ने स्पष्ट किया है कि AAP नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के साथ मिलकर नहीं, बल्कि अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरेगी। इसके साथ ही दोनों दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी कर दी है।

AAP के इस फैसले के बाद विपक्ष पूरी तरह बंटता नजर आ रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि AAP और कांग्रेस के अलग-अलग लड़ने से सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मिलेगा। मौजूदा संख्या बल और समीकरणों को देखते हुए मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर—तीनों पदों पर बीजेपी की जीत लगभग तय मानी जा रही है।

AAP प्रभारी ने कहा कि पार्टी अपनी विचारधारा और संगठनात्मक मजबूती के आधार पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कांग्रेस के साथ तालमेल न बनने की वजह आपसी सहमति का अभाव है। वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे भी स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं और अंतिम समय तक मुकाबला करेंगे।

चंडीगढ़ नगर निगम में बीजेपी पहले से ही मजबूत स्थिति में है। ऐसे में विपक्षी दलों का एकजुट न होना बीजेपी के लिए रास्ता और आसान बना रहा है। पिछले कुछ चुनावों में भी देखा गया है कि जब विपक्ष बंटा, तो बीजेपी को इसका सीधा लाभ मिला। इस बार भी हालात कुछ ऐसे ही बनते दिख रहे हैं।

बीजेपी नेताओं का दावा है कि शहर के विकास कार्यों, प्रशासनिक स्थिरता और केंद्र सरकार के सहयोग के चलते पार्टी को जनता और पार्षदों दोनों का समर्थन मिल रहा है। पार्टी ने तीनों पदों के लिए रणनीति तैयार कर ली है और जीत को लेकर पूरा भरोसा जताया जा रहा है।

अब मेयर चुनाव में असली मुकाबला संख्या बल का नहीं, बल्कि विपक्ष की रणनीति का माना जा रहा है। AAP और कांग्रेस के अलग-अलग चुनाव लड़ने के फैसले ने यह लगभग स्पष्ट कर दिया है कि चंडीगढ़ नगर निगम की कमान एक बार फिर बीजेपी के हाथों में जा सकती है।

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