नागक्षेत्र सरोवर से मरी हुई मछलियां निकालता हुआ पालिकाकर्मी।
मत्सय विभाग की आई रिपोर्ट, पानी में अमोनिया की मात्रा ज्यादा
ओवर फीडिंग से बनता है अमोनिया ज्यादा, मछलियों के मरने का सिलसिला जारी
मत्सय विभाग की टीम ने नागक्षेत्र सरोवर का फिर किया निरीक्षण
सफीदों, (एस• के• मित्तल) : नगर के ऐतिहासिक महाभारतकालीन नागक्षेत्र सरोवर में मछलियां मरने के मामले में मत्सय विभाग की रिपोर्ट आ गई है। इस रिपोर्ट में सामने आया है कि नागक्षेत्र सरोवर के पानी में अमोनिया की मात्रा ज्यादा है और ओवरफीडिंग के कारण अमोनिया ज्यादा बनता है। मत्सय विभाग की माने तो मछलियों की मौत ओवरफीडिंग के कारण हुई है। हालांकि बुधवार को फिर से नागक्षेत्र सरोवर के पानी का सैंपल लिया गया है। जिसे जांच के लिए कुरूक्षेत्र प्रयोगशाला में भेजा जाएगा, ताकि पानी की क्रॉस जांच हो सके। बता दें कि इससे पहले पानी का सैंपल हिसार लैब में भेजा गया था, जहां से पानी में अमोनिया की मात्रा ज्यादा होने की बात कही गई है। बहरहाल नागक्षेत्र सरोवर में मछलियां मरने का सिलसिला लगातार जारी है और सरोवर का पानी सडांध मार रहा है।
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क्या था मामला
हर रोज की भांति कोई श्रद्धालू नागक्षेत्र सरोवर में मछलियों को आटा डालने के लिए आया हुआ था। आटा डालते वक्त उसने देखा कि काफी तादाद में मछलियां घाट के ऊपर मरी हुई है और काफी मछलियां तड़प रही है। मामला सामने आते ही पालिका चेयरपर्सन प्रतिनिधि संजय अदलखा बिट्टा, मंदिर के पुजारी यतींद्र कौशिक व समाजसेवी संजीव गौतम मौके पर पहुंचे थे। उधर मामले की गंभीरता को देखते हुए मत्स्य विभाग की टीम ने यहां पहुंचकर सरोवर के जल के सैंपल लिए थे। उसी वक्त पालिका की ओर से सरोवर के घाटों पर सफेदी डलवाई गई थी। वहीं पानी का संचालन करने के लिए इसमें पंप सैट भी लगाया गया था।
सरोवर के घाट पर जमी हुई गंदगी व मरी हुई मछलियां।
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क्या कहते हैं श्रद्धालु
वहीं मछलियों की मौत से श्रद्धालुओं में कहीं ना कहीं रोष है। नाम ना छापने की सूरत में श्रद्धालुओं ने बताया कि करीब पिछले दो सालों से नहर से पानी नागक्षेत्र सरोवर में नहीं आ रहा है। उन्होंने बताया कि राजा के समय से नहर से पानी नागक्षेत्र में आता है और जब नहर बंद हो जाए, तब नागक्षेत्र से पानी नहर में चला जाता है। इस प्रक्रिया से नागक्षेत्र में पानी बार-बार बदल जाता था। सरोवर में रहने वाले जलीय जीवों को ताजा पानी मिलता रहता था लेकिन पिछले दो साल से नहर से नागक्षेत्र तक पानी लाने वाला नाला बंद पड़ा है। जिसके कारण सरोवर का पानी सड़ गया और मछलियों की यह हालत हो गई। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस नाले को चालू करवाकर नहर का पानी नागक्षेत्र सरोवर में उपलब्ध करवाया जाए ताकि मछलियों व अन्य जलीय जीवों की जान बचाई जा सके।
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क्या-क्या हो सकते हैं समाधान
एक्सपर्ट के अनुसार शहर के लोगों ने फिलहाल फीड डालना बंद करना होगा। नगरपालिका या नागक्षेत्र कमेटी फीड के लिए ड्रम लगा सकती है, ताकि उसे थोड़ा-थोड़ा प्रयोग में लाया जा सके। नागक्षेत्र सरोवर के पानी मे आक्सीजन बनाने के लिए बहरहाल चूना, नमक, पीसी हुई हल्दी, ओएम फ्री व लाल दवाई डाली जा सकती है। इसके अलावा पुराना पानी निकालकर इसमें ताजा पानी से भरना होगा।
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क्या कहते है मत्सय विभाग के डीएफओ
इस मामले में मत्सय विभाग के डीएफओ सुरेंद्र ठुकराल ने बताया कि हिसार सैंपल भेजे गए थे, जिसमें पानी में अधिक मात्रा में अमोनिया आया है। जोकि ओवर फीडिंग की कारण बनता है। जब किसी तालाब में अधिक मात्रा में फीड डाला जाता है तो वह नीचे तली में चला जाता है और धीरे-धीरे वह सड़ना शुरू हो जाता है। जिसके बाद पानी से ऑक्सीजन की मात्रा खत्म हो जाती है और मछलियां मरनी शुरू हो जाती हैं। इसके समाधान के लिए शहर के लोगों ने फिलहाल फीड डालना बंद करना होगा। उन्होंने बताया कि प्रत्येक तालाब की 8 साल के अंदर नीचे की गाद निकालना जरूरी होती है। सफीदों नागक्षेत्र सरोवर की पिछले करीब 20 सालों से गाद नहीं निकल गई है। सरोवर से गाद निकलवाना व पानी का बदलवाना भी बहुत जरूरी है। उनके द्वारा फिलहाल आज फिर सैंपल लिए गए हैं जोकि हिसार और कुरुक्षेत्र दोनों जगह भेजें जाएंगे।