सफीदों, (एस• के• मित्तल) : विश्व हिंदू परिषद के जिला सलाहाकार अरविंद शर्मा ने शिवावतार जगद्गुरु आदि शंकराचार्य के 2533वें प्राकट्य महोत्सव के अवसर पर शुभकामनाएं देते हुए उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य जी ने उस समय जन्म लिया, जब भारत में सनातन धर्म की आध्यात्मिक चेतना कमजोर पड़ चुकी थी। अपने अद्वितीय ज्ञान और दर्शन के माध्यम से उन्होंने इस चेतना को पुनर्जीवित कर समाज को नई दिशा दी। अरविंद शर्मा ने बताया कि आदि शंकराचार्य जी ने अल्पायु में ही पूरे देश का भ्रमण किया और लोगों को धर्म, संस्कृति और एकता का संदेश दिया। उनकी पदयात्राएं केवल धार्मिक नहीं थीं, बल्कि सामाजिक समरसता को बढ़ाने का माध्यम भी बनीं। उनके प्रयासों से ही हिंदू धर्म के शास्त्र और परंपराएं आज भी सुरक्षित और जीवंत हैं। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य जी ने देश के चारों दिशाओं में चार मठों की स्थापना कर राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया। इसके साथ ही 12 ज्योतिर्लिंगों, 108 शक्तिपीठों और महाकुंभ जैसे धार्मिक आयोजनों के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। शर्मा ने आगे कहा कि चार धाम यात्रा की परंपरा और सनातन धर्म की वर्तमान संरचना का श्रेय भी आदि शंकराचार्य जी की दूरदर्शिता को जाता है। उनके द्वारा दिखाया गया आध्यात्मिक मार्ग आज भी मानव जीवन के उत्थान के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। इस अवसर पर उन्होंने सभी सनातन धर्मावलंबियों से अपील की कि वे वैशाख शुक्ल पंचमी के दिन अपने घरों में दीपक जलाकर जगद्गुरु आदि शंकराचार्य जी के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करें तथा उनकी जयंती को श्रद्धापूर्वक मनाएं। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के विचारों को अपनाकर ही समाज को सही दिशा दी जा सकती है और एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है।
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