अमेरिका भेजने के नाम पर ₹50 लाख की ठगी का आरोप, अनिल विज के ड्राइवर का बेटा 14 महीने बाद डिपोर्ट

2

हरियाणा के मंत्री अनिल विज के ड्राइवर के साथ बेटे को अमेरिका भेजने के नाम पर करीब ₹50 लाख की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि एजेंट ने युवक को वैध तरीके से अमेरिका भेजने का भरोसा दिया, लेकिन उसे कथित तौर पर डंकी रूट के जरिए अमेरिका पहुंचाया गया। वहां युवक करीब 14 महीने तक डिटेंशन में रहा और बाद में उसे भारत डिपोर्ट कर दिया गया। मामले में एजेंट के खिलाफ शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की गई है।

जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता अपने बेटे को बेहतर भविष्य और रोजगार के लिए अमेरिका भेजना चाहता था। इसी दौरान उसका संपर्क विदेश भेजने का काम करने वाले एक एजेंट से हुआ।

आरोप है कि एजेंट ने युवक को अमेरिका पहुंचाने के बदले बड़ी रकम मांगी। परिवार ने उसकी बातों पर भरोसा करते हुए अलग-अलग समय पर करीब ₹50 लाख का भुगतान किया।

परिवार का दावा है कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि युवक को सुरक्षित और उचित प्रक्रिया के तहत अमेरिका पहुंचाया जाएगा।

लेकिन बाद में युवक को सीधे और वैध यात्रा के बजाय अलग-अलग देशों से होते हुए कथित डंकी रूट पर भेजे जाने की बात सामने आई।

डंकी रूट में आमतौर पर लोगों को कई देशों से होकर अनधिकृत तरीके से सीमा पार कराने का प्रयास किया जाता है। ऐसी यात्राओं में गिरफ्तारी, हिंसा, लूट और जान का खतरा तक हो सकता है।

लंबे और मुश्किल सफर के बाद युवक अमेरिका पहुंचा, लेकिन वहां आव्रजन अधिकारियों ने उसे हिरासत में ले लिया।

परिवार के मुताबिक युवक करीब 14 महीने तक डिटेंशन में रहा। इस दौरान परिवार उसकी रिहाई और अमेरिका में रहने की अनुमति मिलने की उम्मीद करता रहा।

हालांकि आखिरकार अमेरिकी अधिकारियों ने युवक को भारत डिपोर्ट कर दिया। उसके वापस लौटने के बाद परिवार को कथित ठगी और पूरे घटनाक्रम की जानकारी विस्तार से मिली।

परिवार का आरोप है कि करीब ₹50 लाख खर्च करने के बावजूद न केवल युवक अमेरिका में नहीं रह सका, बल्कि उसे लंबे समय तक हिरासत में भी रहना पड़ा।

इसके बाद एजेंट से रकम वापस मांगने और मामले का समाधान करने का प्रयास किया गया। कथित तौर पर पैसा वापस नहीं मिलने पर मामला पुलिस तक पहुंचा।

शिकायत में एजेंट पर धोखाधड़ी और विदेश भेजने के नाम पर गुमराह करने के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की सत्यता अब पुलिस जांच से निर्धारित होगी।

पुलिस के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू एजेंट और शिकायतकर्ता के बीच हुए आर्थिक लेनदेन की जांच होगी। बैंक ट्रांजैक्शन, रसीद, ऑनलाइन भुगतान या अन्य रिकॉर्ड उपलब्ध होने पर उन्हें साक्ष्य के तौर पर देखा जा सकता है।

इसके अलावा युवक की यात्रा से जुड़े पासपोर्ट, टिकट और इमिग्रेशन रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण होंगे। इनसे यह पता चल सकता है कि उसे किन देशों के रास्ते अमेरिका तक ले जाया गया।

पुलिस एजेंट के लाइसेंस और विदेश भेजने से संबंधित उसकी वैधानिक स्थिति की भी जांच कर सकती है।

यह भी पता लगाया जा सकता है कि आरोपी एजेंट ने केवल इसी परिवार से पैसे लिए या अन्य युवाओं को भी इसी तरह विदेश भेजने का दावा किया था।

यदि अन्य पीड़ित सामने आते हैं तो मामले का दायरा बढ़ सकता है। पुलिस एजेंट से जुड़े अन्य लोगों और संभावित नेटवर्क की भूमिका की भी जांच कर सकती है।

विदेश जाने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए यह मामला एक महत्वपूर्ण चेतावनी भी है। किसी एजेंट को बड़ी रकम देने से पहले उसके लाइसेंस, वीजा प्रक्रिया और यात्रा के कानूनी तरीके की पुष्टि करना जरूरी है।

फिलहाल अनिल विज के ड्राइवर की शिकायत के आधार पर ₹50 लाख की कथित धोखाधड़ी से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है। युवक के करीब 14 महीने अमेरिकी डिटेंशन में रहने और फिर भारत डिपोर्ट किए जाने के बाद परिवार ने एजेंट के खिलाफ कार्रवाई और रकम वापस दिलाने की मांग की है।

Loading