सोनीपत : हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान हत्याकांड की जांच का असर अब गैंगस्टर राहुल उर्फ भोलू शाहपुरिया के गांव शाहपुर में भी दिखाई दे रहा है। भोलू के नाम से सोशल मीडिया पर हत्या की जिम्मेदारी लेने का दावा सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस की टीमें गांव में लगातार जांच और दबिश दे रही हैं। ग्रामीणों का दावा है कि बार-बार हो रही पुलिस कार्रवाई से गांव में डर का माहौल है और कई युवा अपने घर छोड़कर दूसरी जगह चले गए हैं।
सोनीपत जिला मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर शाहपुर गांव के लोगों का कहना है कि दिन के समय सामान्य गतिविधियां दिखाई देती हैं, लेकिन रात होते ही गलियों में सन्नाटा बढ़ जाता है। ग्रामीणों का दावा है कि रात में पुलिस और सिविल ड्रेस में लोग गांव में आते-जाते दिखाई देते हैं। कुछ वाहनों पर नंबर प्लेट नहीं होने का भी दावा किया गया है। इन बातों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीण दिलावर के मुताबिक गांव के करीब 20 से 25 युवक सरकारी और निजी क्षेत्र में नौकरी करते हैं। उनका दावा है कि पुलिस कार्रवाई के डर से इनमें से कई युवक फिलहाल गांव से बाहर चले गए हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि किसी व्यक्ति को केवल भोलू से परिचय, रिश्तेदारी या गांव से संबंध होने के आधार पर जांच में न घसीटा जाए।
गांव के जयकिशन शर्मा का कहना है कि यदि भोलू ने कोई अपराध किया है तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इससे गांव के निर्दोष लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। ग्रामीणों ने मांग की है कि बाहर से आने वाली पुलिस टीमें स्थानीय पुलिस को साथ लेकर और संभव हो तो दिन के समय कार्रवाई करें।
कुछ ग्रामीणों ने रात के समय ड्रोन से निगरानी किए जाने का भी दावा किया है। उनका कहना है कि सिविल ड्रेस में लोगों और बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों की आवाजाही से यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि गांव में आने वाले लोग पुलिस से जुड़े हैं या कोई अन्य। पुलिस की ओर से इन दावों पर आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
ग्रामीणों के अनुसार स्थिति का असर महिलाओं और बच्चों पर भी पड़ रहा है। गली में किसी वाहन या लोगों की आहट होने पर लोग घरों से बाहर निकलकर देखने लगते हैं। गांव की आबादी करीब ढाई हजार बताई गई है।
भोलू शाहपुरिया की मां राजपति के मुताबिक उनका बेटा करीब चार साल से गांव नहीं आया है। उन्होंने बताया कि भोलू ने 12वीं तक पढ़ाई की थी और काम के लिए गांव से बाहर गया था। इसके बाद अलग-अलग आपराधिक मामलों में उसका नाम सामने आने लगा। परिवार का कहना है कि अब उसका भोलू से कोई संपर्क नहीं है।
राजपति के अनुसार उनके पति सुरेश का 26 जुलाई को निधन हुआ था, लेकिन भोलू अंतिम संस्कार में भी गांव नहीं पहुंचा। उनका दूसरा बेटा रितेश भी फिलहाल घर पर नहीं है। परिवार ने भोलू से नाता नहीं होने की बात दोहराई है।
इस बीच मंगलवार को शाहपुर गांव में पंचायत भी हुई। ग्रामीणों ने अंकित बालियान की हत्या पर दुख जताते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। पंचायत में कहा गया कि हत्याकांड में शामिल लोगों को पकड़ने के लिए गांव पुलिस और जांच एजेंसियों का सहयोग करेगा।
इसके साथ ही पंचायत ने मांग रखी कि कार्रवाई वास्तविक आरोपियों और जांच में सामने आने वाले संदिग्धों तक सीमित रखी जाए। केवल किसी व्यक्ति के गांव, रिश्तेदारी या परिचय के आधार पर निर्दोष युवाओं को परेशान न किया जाए।
अंकित बालियान हत्याकांड के बाद भोलू शाहपुरिया के नाम से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट सामने आई थी, जिसमें हत्या की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया था। हालांकि सोशल मीडिया पर किया गया ऐसा दावा अपने आप में किसी व्यक्ति की अपराध में भूमिका साबित नहीं करता। इसकी प्रामाणिकता और भोलू की कथित भूमिका जांच का विषय है।
फिलहाल पुलिस हत्याकांड से जुड़े नेटवर्क और फरार आरोपियों की तलाश में जांच आगे बढ़ा रही है। वहीं शाहपुर के ग्रामीणों का कहना है कि वे जांच में सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन पुलिस कार्रवाई पारदर्शी तरीके से हो ताकि निर्दोष लोगों में भय की स्थिति पैदा न हो।
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