चंडीगढ़ नगर निगम की हाईमास्ट लाइट परियोजना एक बार फिर विवादों में आ गई है। परियोजना में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। विभागीय जांच के दौरान कथित रूप से कई खामियां सामने आने के बाद संबंधित अधिकारी ने भुगतान रोकने की सिफारिश की है। मामले के सामने आने के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर भी चर्चा तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर लगाए गए हाईमास्ट ढांचों में जंग लगने, घटिया गुणवत्ता की सामग्री इस्तेमाल होने और तकनीकी मानकों का पालन न किए जाने जैसी शिकायतें सामने आईं। जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि कुछ उपकरण तय गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाए गए। इसके बाद संबंधित जूनियर इंजीनियर ने बिल भुगतान पर रोक लगाने और पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने की सिफारिश की।
मामले के सार्वजनिक होने के बाद नगर निगम प्रशासन पर जवाबदेही का दबाव बढ़ गया है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने भी परियोजना की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि सार्वजनिक धन से किए जा रहे विकास कार्यों में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाईमास्ट लाइट जैसी परियोजनाएं सीधे सार्वजनिक सुरक्षा और शहर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी होती हैं, इसलिए इनमें तकनीकी मानकों का पालन बेहद जरूरी है। यदि निर्माण कार्य में लापरवाही बरती गई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि मामले की रिपोर्ट की समीक्षा की जा रही है और सभी पहलुओं की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल इस मुद्दे ने शहर में प्रशासनिक पारदर्शिता और विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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