दिल्ली धमाके से पहले पासपोर्ट प्रक्रिया
दिल्ली में हुए धमाके के बाद सुरक्षा एजेंसियों की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इसी कड़ी में एक महिला संदिग्ध का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है, जिसके बारे में अधिकारियों का कहना है कि घटना से कुछ दिन पहले वह देश छोड़ने की तैयारी में थी। पासपोर्ट संबंधी औपचारिकताओं में मिली जानकारी ने पूरे मामले को नई दिशा दे दी है।
सूत्रों के मुताबिक, यह महिला पिछले कई महीनों से अपनी पहचान बदलकर सक्रिय थी और संपर्कों के माध्यम से विदेश जाने की योजना बना रही थी। जांच में सामने आया है कि उसने वारदात से लगभग एक सप्ताह पहले अल-फलाह यूनिवर्सिटी के माध्यम से अपने दस्तावेजों की वेरिफिकेशन करवाई थी। यह कदम संभवतः उसकी विदेश यात्रा की तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है।
एजेंसियों का कहना है कि संदिग्ध ने कई बार गुप्त कोडनेम का उपयोग किया, जिनमें से एक नाम “मैडम सर्जन” भी बताया जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि नेटवर्क के अंदर उसकी एक अलग पहचान बनाई गई थी, ताकि किसी भी समय उसकी मूल जानकारी उजागर न हो सके। जांच अधिकारी इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि उसे यह कोडनेम किसने दिया और इसके पीछे क्या रणनीति थी।
अब सुरक्षा टीमें उसके डिजिटल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा और संचार माध्यमों का विश्लेषण कर रही हैं। प्रारंभिक जानकारी से यह भी सामने आया है कि धमाके से पहले उसकी गतिविधियां असामान्य रूप से बढ़ी हुई थीं। कई स्थानों पर उसकी मौजूदगी ने जांच को और जटिल बना दिया है।
हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि अभी भी कई पहलुओं की पुष्टि बाकी है। विश्वविद्यालय प्रशासन और स्थानीय पुलिस को भी जांच में सहयोग के लिए शामिल किया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि पासपोर्ट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया ने उसकी योजनाओं को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, और संभव है कि यही सुराग पूरे नेटवर्क को समझने में निर्णायक साबित हो।
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