फरीदाबाद के सीही गांव में 250 फीट गहरे बोरवेल में गिरकर जान गंवाने वाली तीन वर्षीय नेहा के साथ खेल रही बच्ची ने हादसे से पहले की स्थिति बताई है। आठ वर्षीय शिविका के अनुसार, रविवार शाम दो सांड बच्चों की ओर दौड़े थे। उनसे बचने के लिए सभी बच्चे अलग-अलग दिशाओं में भागे और इसी दौरान नेहा खुले बोरवेल में गिर गई। प्रदेश सरकार ने उसके परिवार को पांच लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है।
शिविका ने बताया कि उस समय नेहा की चार वर्षीय बहन गौरी और एक अन्य बच्ची भी साथ खेल रही थीं। नेहा के गिरते ही बच्चियां मदद मांगने उसके घर दौड़ीं। परिवार के अनुसार, बोरवेल के मुंह पर केवल एक ईंट रखी थी। भागते समय नेहा का हाथ ईंट से टकराया और वह नीचे चली गई।
नेहा की बुआ रूबी ने बताया कि बच्चों की बात सुनकर परिवार पहले आसपास बच्ची को खोजने लगा। बोरवेल के पास पहुंचने पर भीतर से उसके रोने की आवाज सुनाई दी। परिवार और पड़ोसियों ने पांच-छह साड़ियां जोड़कर तथा रस्सी डालकर उसे निकालने की कोशिश की। करीब 20 मिनट तक प्रयास के बाद भी सफलता नहीं मिली। इसके बाद पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे।
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ ने करीब दस घंटे तक बचाव अभियान चलाया। सोमवार सुबह लगभग चार बजे नेहा को बाहर निकालकर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। एनडीआरएफ अधिकारी कुणाल तिवारी के मुताबिक, बच्ची 200 फीट से अधिक गहराई पर अटकी थी और बोरवेल में पानी होने से अभियान कठिन हो गया था।
घटनास्थल से कुछ दूरी पर संत सूरदास पार्क में भी एक बोरवेल प्लास्टिक के कट्टे और पत्थर से ढका मिला। पुलिस के अनुसार, परिवार की ओर से अभी शिकायत नहीं मिली है; माता-पिता के बयान दर्ज कर पोस्टमॉर्टम कराया गया है। नगर निगम का कहना है कि हादसे वाला बोरवेल वर्षों से बंद था। उसका ढक्कन कैसे हटा, इसकी जांच की जा रही है।
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