हादसे के बाद जेजे बोर्ड का अलग कदम, ट्रैफिक अनुशासन सिखाने पर जोर
फतेहाबाद में किशोर न्याय बोर्ड (जेजे बोर्ड) ने एक सड़क हादसे से जुड़े मामले में नाबालिग को अनोखी और संदेश देने वाली सजा सुनाई है। बोर्ड ने नाबालिग को जेल या जुर्माने की बजाय सुधारात्मक रास्ता अपनाते हुए तीन महीने तक ट्रैफिक पुलिस के साथ रहकर यातायात नियम सीखने का आदेश दिया है। यह फैसला उस मामले में आया है, जिसमें नाबालिग ने वाहन चलाते हुए एक बुजुर्ग व्यक्ति को टक्कर मार दी थी।
मामले की सुनवाई के दौरान बोर्ड के सामने यह तथ्य आया कि नाबालिग की गलती लापरवाही और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी से जुड़ी थी। हालांकि घटना गंभीर थी, लेकिन आरोपी की उम्र और भविष्य को ध्यान में रखते हुए जेजे बोर्ड ने दंडात्मक कार्रवाई के बजाय सुधार पर आधारित सजा को प्राथमिकता दी।
बोर्ड के आदेश के अनुसार, नाबालिग को तीन माह तक ट्रैफिक पुलिस के साथ रहकर सड़क सुरक्षा, सिग्नल सिस्टम, हेलमेट और सीट बेल्ट की अहमियत, तेज रफ्तार के खतरे और पैदल यात्रियों की सुरक्षा जैसे विषयों पर प्रशिक्षण लेना होगा। इस दौरान उसे ट्रैफिक पुलिस की दैनिक गतिविधियों को नजदीक से देखने और समझने का भी अवसर मिलेगा।
अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की सजा का उद्देश्य नाबालिग को अपराधी बनाना नहीं, बल्कि उसे जिम्मेदार नागरिक बनाना है। इससे न केवल आरोपी को अपनी गलती का अहसास होगा, बल्कि वह आगे चलकर दूसरों को भी यातायात नियमों के पालन के लिए प्रेरित कर सकेगा।
इस फैसले की समाज में सराहना हो रही है। लोगों का मानना है कि नाबालिगों से जुड़े मामलों में सुधारात्मक और शिक्षात्मक दृष्टिकोण ज्यादा प्रभावी साबित हो सकता है। खासकर सड़क हादसों के मामलों में, जहां जागरूकता की कमी बड़ी वजह होती है।
जेजे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी नाबालिगों से जुड़े मामलों में परिस्थितियों के अनुसार ऐसे फैसले लिए जाएंगे, ताकि कानून के साथ-साथ समाज में सकारात्मक संदेश भी जा सके। यह फैसला सड़क सुरक्षा और जिम्मेदार ड्राइविंग को लेकर एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
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