अस्पताल की नई इमारत पर सियासी घमासान तेज, यशपाल बत्रा ने नरबीर सिंह के प्रस्ताव को दिया समर्थन

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Gurugram Civil Hospital

गुरुग्राम। हरियाणा के गुरुग्राम में प्रस्तावित नए नागरिक अस्पताल के निर्माण को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री आरती राव और कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह के बीच अस्पताल निर्माण को लेकर चल रही बयानबाजी में अब पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर एवं भाजपा नेता यशपाल बत्रा भी शामिल हो गए हैं। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के रुख से असहमति जताते हुए राव नरबीर सिंह के चार अस्पताल बनाने के प्रस्ताव का खुलकर समर्थन किया है।

इस घटनाक्रम के बाद गुरुग्राम की स्थानीय राजनीति में अस्पताल निर्माण का मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है। भाजपा नेताओं के बीच अलग-अलग राय सामने आने से प्रस्तावित अस्पताल की जगह और शहर की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

चार अस्पताल बनाने के प्रस्ताव का समर्थन

यशपाल बत्रा ने कहा कि गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार आवश्यक है। उन्होंने राव नरबीर सिंह के एक बड़े अस्पताल के स्थान पर चार अस्पताल विकसित करने के सुझाव का समर्थन किया।

बत्रा ने शहर के बीचोंबीच अस्पताल बनाने के प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा कि सदर बाजार और बस स्टैंड के आसपास पहले से ही यातायात का भारी दबाव रहता है। ऐसे में यहां अस्पताल बनने से मरीजों और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

एम्बुलेंस के जाम में फंसने की जताई आशंका

बत्रा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अस्पताल ऐसी जगह होना चाहिए, जहां मरीजों को बिना बाधा तत्काल चिकित्सा सुविधा मिल सके। उन्होंने आशंका जताई कि भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में अस्पताल बनने से आपातकालीन मरीजों को पहुंचाने वाली एम्बुलेंस ट्रैफिक जाम में फंस सकती हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि गंभीर मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाएंगे तो नई स्वास्थ्य सुविधा का वास्तविक लाभ कैसे मिलेगा।

भाजपा में मतभेदों से गरमाई राजनीति

स्वास्थ्य मंत्री आरती राव और कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह के अलग-अलग रुख के बीच बत्रा के बयान ने विवाद को नया मोड़ दे दिया है।

अब अस्पताल निर्माण के स्थान और प्रस्तावित स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सरकार के अंतिम निर्णय पर निगाहें टिकी हैं। फिलहाल इस मुद्दे पर भाजपा नेताओं के बीच सहमति बनती दिखाई नहीं दे रही है।

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