गुरुग्राम में RTI सूचना नहीं देने पर तत्कालीन तहसीलदार पर ₹25 हजार जुर्माना, सूचना आयोग ने विभाग को लगाई फटकार

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Gurugram RTI

गुरुग्राम में सूचना के अधिकार (RTI) से जुड़े एक मामले में सूचना आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए तत्कालीन तहसीलदार पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। मामला मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराने से जुड़ा बताया जा रहा है। सुनवाई के दौरान सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को लेकर आयोग ने संबंधित विभाग को भी फटकार लगाई।

मामले में खास बात यह सामने आई कि मांगी गई जानकारी तलाशने के लिए ChatGPT जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल का सहारा लिए जाने का भी उल्लेख हुआ, लेकिन इसके बावजूद आवेदक को अपेक्षित आधिकारिक सूचना उपलब्ध नहीं हो सकी।

RTI के तहत मांगी जाने वाली सूचना संबंधित सरकारी विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड से उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे में किसी बाहरी AI टूल पर जानकारी खोजने के बजाय विभाग के पास उपलब्ध फाइलों, रजिस्टर, आदेशों और अन्य रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होती है।

बताया जा रहा है कि सूचना उपलब्ध कराने में हुई देरी या विफलता को आयोग ने गंभीरता से लिया। मामले की सुनवाई के बाद तत्कालीन तहसीलदार पर अधिकतम 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाए जाने की बात सामने आई है।

सूचना आयोग ने विभाग की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई। आयोग का रुख इस बात को लेकर सख्त रहा कि RTI आवेदन का जवाब निर्धारित प्रक्रिया और उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर दिया जाना चाहिए।

इस मामले में ChatGPT का उल्लेख इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जनरेटिव AI सामान्य जानकारी खोजने या समझने में मदद कर सकता है, लेकिन वह किसी सरकारी कार्यालय के आंतरिक या अप्रकाशित रिकॉर्ड का विकल्प नहीं है।

यदि RTI के तहत मांगी गई सूचना किसी विभाग के रिकॉर्ड में मौजूद है तो संबंधित जन सूचना अधिकारी की जिम्मेदारी होती है कि वह लागू कानून और नियमों के अनुसार रिकॉर्ड तलाशकर सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अपनाए।

वहीं यदि कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है या सूचना किसी अन्य कार्यालय से संबंधित है तो उस स्थिति में भी आवेदक को नियमानुसार स्पष्ट जवाब दिया जाना आवश्यक होता है।

आयोग के आदेश के बाद अब विभागीय स्तर पर भी यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जुर्माना लगाने के साथ आयोग की टिप्पणियां भविष्य में RTI आवेदनों के निपटारे की प्रक्रिया को लेकर अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण संदेश मानी जा सकती हैं।

यह प्रकरण सरकारी कार्यालयों में डिजिटल और AI तकनीक के इस्तेमाल को लेकर भी एक अहम सवाल सामने लाता है। तकनीक अधिकारियों की सहायता कर सकती है, लेकिन आधिकारिक सूचना की प्रामाणिकता संबंधित विभाग के मूल रिकॉर्ड और अधिकृत दस्तावेजों से ही तय होती है।

RTI कानून का उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है। इसलिए आवेदनों का समय पर और रिकॉर्ड आधारित जवाब देना इसकी प्रभावशीलता के लिए जरूरी है।

फिलहाल गुरुग्राम के इस RTI मामले में तत्कालीन तहसीलदार पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाए जाने और संबंधित विभाग को फटकार लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। ChatGPT से जानकारी तलाशने का पहलू भी चर्चा में है, लेकिन मामले से संबंधित विस्तृत तथ्य सूचना आयोग के आधिकारिक आदेश से ही अंतिम रूप से स्पष्ट होंगे।

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