किसानों से पराली नहीं जलाने की अपील, सही प्रबंधन पर ₹1,200 प्रति एकड़ सहायता

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Haryana Agriculture

हरियाणा के रोहतक में किसानों को फसल अवशेष यानी पराली नहीं जलाने की सलाह दी गई है। किसानों से पराली का उचित प्रबंधन करने और कृषि यंत्रों का उपयोग कर इसे खेत में ही संभालने की अपील की गई है। इसके लिए किसानों को आर्थिक सहायता और कृषि यंत्रों पर सब्सिडी का लाभ देने की व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पराली का सही प्रबंधन करने वाले पात्र किसानों को ₹1,200 प्रति एकड़ की दर से सहायता दी जा सकती है। इसके अलावा, कृषि यंत्रों की खरीद पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान बताया गया है। इन सुविधाओं का उद्देश्य किसानों को फसल अवशेषों के निपटान के वैकल्पिक तरीके अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

पराली जलाने से खेतों के आसपास वायु प्रदूषण बढ़ सकता है। इसका असर वातावरण के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। ऐसे में फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करना महत्वपूर्ण माना जाता है। किसान पराली को खेत में मिलाने, उसका उपयोग अन्य कृषि गतिविधियों में करने या उपयुक्त मशीनों की मदद से उसका प्रबंधन करने जैसे विकल्प अपना सकते हैं।

कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी से किसानों को पराली प्रबंधन के लिए आवश्यक मशीनें खरीदने में आर्थिक मदद मिल सकती है। हालांकि, सहायता और सब्सिडी का लाभ लेने के लिए पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और संबंधित नियमों की जानकारी आधिकारिक कृषि विभाग से प्राप्त करना जरूरी है।

किसानों के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि वे पराली प्रबंधन से संबंधित सरकारी योजनाओं की समय-सीमा और आवेदन की शर्तों की जानकारी रखें। इससे उन्हें उपलब्ध सहायता का लाभ लेने में सुविधा हो सकती है।

फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में योजना के आवेदन की अंतिम तिथि, पात्रता की विस्तृत शर्तों और संबंधित विभाग के अधिकारियों का बयान शामिल नहीं है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे सहायता राशि और कृषि यंत्रों पर सब्सिडी के संबंध में नवीनतम जानकारी के लिए कृषि विभाग से संपर्क करें।

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