हरियाणा में एंटी टेरर स्क्वॉड (ATS) के प्रस्तावित ढांचे को लेकर अब वित्त विभाग और पुलिस मुख्यालय के बीच चर्चा तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार फाइनेंस डिपार्टमेंट ने ATS के स्ट्रक्चर और उस पर होने वाले खर्च को लेकर कई सवाल उठाए हैं। विभाग ने दूसरे राज्यों में संचालित ATS यूनिट्स के खर्च, स्टाफिंग और कार्यप्रणाली का पूरा विवरण मांगा था, जिसके जवाब में डीजीपी कार्यालय ने विस्तृत रिपोर्ट भेज दी है।
सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित ATS यूनिट में कुल 575 अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति की योजना बनाई गई है। इसमें विभिन्न रैंक के पुलिस अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, साइबर एक्सपर्ट और इंटेलिजेंस स्टाफ शामिल होंगे। सरकार का उद्देश्य राज्य में आतंकवाद, संगठित अपराध और साइबर खतरों से निपटने के लिए एक मजबूत और आधुनिक सुरक्षा ढांचा तैयार करना है।
हालांकि वित्त विभाग का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर नई यूनिट खड़ी करने से सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ सकता है। इसी कारण विभाग ने यह जानना जरूरी समझा कि अन्य राज्यों में ATS किस प्रकार कार्य कर रही है और वहां कितना बजट खर्च किया जा रहा है। इसके बाद डीजीपी कार्यालय ने महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत कई राज्यों के ATS मॉडल का हवाला देते हुए अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बदलते सुरक्षा हालात को देखते हुए हरियाणा में आधुनिक ATS यूनिट की जरूरत महसूस की जा रही है। खासतौर पर साइबर अपराध, कट्टरपंथी गतिविधियों और अंतरराज्यीय नेटवर्क पर निगरानी के लिए विशेष संसाधनों की आवश्यकता है। अब सरकार वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं की समीक्षा के बाद अंतिम फैसला ले सकती है।
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