2.5 करोड़ खर्च के बाद रद्द हुआ कोल ब्लॉक, केंद्र के फैसले से बिजली आपूर्ति पर संकट
हरियाणा को झारखंड में आवंटित किया गया कोल ब्लॉक रद्द कर दिया गया है, जिससे राज्य की ऊर्जा योजनाओं को बड़ा झटका लगा है। इस कोल ब्लॉक पर अब तक करीब ढाई करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे। केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद हरियाणा में भविष्य की बिजली आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। माना जा रहा है कि इसका सीधा असर राज्य के बिजली उत्पादन और ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर पड़ेगा।
जानकारी के अनुसार, हरियाणा सरकार को झारखंड में यह कोल ब्लॉक बिजली उत्पादन के लिए आवंटित किया गया था। इसका उद्देश्य राज्य के थर्मल पावर प्लांट्स को सस्ता और स्थायी कोयला उपलब्ध कराना था। लेकिन अब कोल ब्लॉक के रद्द होने से यह योजना अधर में लटक गई है। अधिकारियों का कहना है कि ब्लॉक के सर्वे, तकनीकी अध्ययन और अन्य प्रक्रियाओं पर पहले ही बड़ी राशि खर्च हो चुकी थी।
कोल ब्लॉक रद्द होने के पीछे तीन प्रमुख वजहें सामने आई हैं। पहली वजह यह बताई जा रही है कि तय समयसीमा में आवश्यक औपचारिकताएं और खनन प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। दूसरी वजह पर्यावरणीय और वन मंजूरी से जुड़ी अड़चनें रहीं, जिससे परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई। तीसरी वजह केंद्र सरकार की नीतियों में बदलाव और कोयला आवंटन से जुड़े नए दिशा-निर्देश माने जा रहे हैं।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से हरियाणा को अब अन्य राज्यों या निजी कंपनियों से कोयला खरीदना पड़ेगा, जिससे बिजली उत्पादन की लागत बढ़ सकती है। इसका असर आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। गर्मियों के मौसम में जब बिजली की मांग चरम पर होती है, तब यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
हरियाणा सरकार के स्तर पर अब वैकल्पिक इंतजामों पर विचार शुरू हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि राज्य बिजली संकट से निपटने के लिए अन्य स्रोतों से कोयला आपूर्ति और वैकल्पिक ऊर्जा विकल्पों पर काम करेगा। हालांकि, कोल ब्लॉक रद्द होने से जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई आसान नहीं होगी।
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