चंडीगढ़। हरियाणा के खेल विभाग की रिकॉर्ड संबंधी गलती के चलते एक गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी को मिलने वाली पुरस्कार राशि में भारी अंतर सामने आया है। खिलाड़ी को 3 करोड़ रुपये के बजाय केवल 7.50 लाख रुपये मिले। विभाग के रिकॉर्ड में खिलाड़ी को पदक विजेता की जगह प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाला प्रतिभागी दर्ज कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों ने इसे क्लेरिकल मिस्टेक बताया है।
गोल्ड मेडल के बावजूद प्रतिभागी की श्रेणी में नाम
जानकारी के अनुसार, खिलाड़ी ने प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल हासिल किया था। इसके बावजूद खेल विभाग के रिकॉर्ड में उसका नाम पार्टिसिपेंट के रूप में दर्ज हो गया। इसी वर्गीकरण के आधार पर उसे 7.50 लाख रुपये की राशि दी गई, जबकि खिलाड़ी के अनुसार उसे गोल्ड मेडल के लिए निर्धारित 3 करोड़ रुपये मिलने चाहिए थे।
अधिकारियों ने मानी रिकॉर्ड की गलती
मामले पर संबंधित अधिकारियों का कहना है कि यह क्लेरिकल मिस्टेक यानी कार्यालयी स्तर पर हुई लिपिकीय गलती है। अब इस मामले में रिकॉर्ड और पुरस्कार राशि से जुड़े दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होगी, ताकि गलती को सुधारकर खिलाड़ी को नियमानुसार भुगतान किया जा सके।
खेल विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस घटना ने खेल विभाग में खिलाड़ियों के परिणामों और पुरस्कार राशि के रिकॉर्ड के सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सम्मान राशि देने से पहले रिकॉर्ड का सही मिलान होना जरूरी है, ताकि किसी खिलाड़ी को प्रशासनिक गलती के कारण आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।
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