हरियाणा में मानसून की देरी का असर अब बिजली व्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। लगातार पड़ रही भीषण गर्मी और उमस के कारण प्रदेश में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, बिजली की अधिकतम मांग 14,429 मेगावाट तक पहुंच गई, जिससे बिजली व्यवस्था पर भारी दबाव बन गया है। बढ़ती मांग के मुकाबले आपूर्ति में कमी आने से कई क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है।
ऊर्जा विभाग के अनुसार, इस समय प्रदेश में बिजली की उपलब्धता और मांग के बीच करीब 6 प्रतिशत का अंतर बना हुआ है। घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ उद्योगों और किसानों की बिजली जरूरत भी लगातार बढ़ रही है। एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य विद्युत उपकरणों के अधिक उपयोग के कारण बिजली खपत में लगातार इजाफा हो रहा है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, प्रदेशवासियों को राहत के लिए अभी करीब दो दिन और इंतजार करना पड़ सकता है। इसके बाद मानसून के सक्रिय होने और कई जिलों में बारिश होने की संभावना जताई गई है। बारिश शुरू होने के बाद तापमान में गिरावट आने और बिजली की मांग में भी कमी आने की उम्मीद है।
बिजली विभाग का कहना है कि बढ़ती मांग के बावजूद उपभोक्ताओं को बेहतर आपूर्ति देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न बिजलीघरों और ग्रिडों से समन्वय बनाकर आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। वहीं, लोगों से भी अपील की गई है कि वे आवश्यकता अनुसार ही बिजली का उपयोग करें और अनावश्यक खपत से बचें।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के सक्रिय होने के बाद प्रदेश को गर्मी और उमस से राहत मिलेगी, जिससे बिजली व्यवस्था पर पड़ रहा अतिरिक्त दबाव भी कम होगा। फिलहाल प्रशासन और बिजली विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
![]()











