रोहतक यूनिवर्सिटी के छात्रों की हरियाणवी फिल्म ‘रेत का घेरा’ तैयार, कैंपस में होगा पहला शो; सितंबर में रिलीज

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Haryanvi Film

रोहतक यूनिवर्सिटी के छात्रों ने अपनी प्रतिभा को बड़े पर्दे तक पहुंचाते हुए हरियाणवी फिल्म ‘रेत का घेरा’ तैयार की है। खास बात यह है कि जिस संस्थान में छात्रों ने फिल्म निर्माण की बारीकियां सीखीं, वहीं फिल्म की पहली स्क्रीनिंग आयोजित की जाएगी। इसके बाद सितंबर में फिल्म को दर्शकों के लिए रिलीज करने की तैयारी है।

फिल्म निर्माण से जुड़े छात्रों के लिए यह प्रोजेक्ट केवल शैक्षणिक अभ्यास तक सीमित नहीं रहा। पढ़ाई के दौरान सीखी गई स्क्रिप्ट राइटिंग, निर्देशन, कैमरा, अभिनय और एडिटिंग जैसी तकनीकों को उन्होंने वास्तविक फिल्म निर्माण में इस्तेमाल किया।

‘रेत का घेरा’ के निर्माण में छात्रों की सक्रिय भागीदारी रही है। इससे उन्हें कैमरे के सामने और पर्दे के पीछे दोनों तरह के काम का व्यावहारिक अनुभव मिला।

फिल्म की पहली स्क्रीनिंग यूनिवर्सिटी या संबंधित संस्थान में किए जाने की योजना इसे खास बनाती है। यहीं छात्रों ने फिल्म निर्माण से संबंधित प्रशिक्षण लिया और अब अपनी तैयार फिल्म को पहली बार इसी मंच पर प्रदर्शित करेंगे।

स्क्रीनिंग के दौरान संस्थान के शिक्षक, विद्यार्थी और फिल्म से जुड़े अन्य लोग मौजूद रह सकते हैं।

छात्रों के लिए यह मौका अपने शिक्षकों और साथियों के सामने अपनी रचनात्मक मेहनत प्रस्तुत करने का होगा।

हरियाणवी सिनेमा पिछले कुछ वर्षों में लगातार नए विषयों और युवा कलाकारों के कारण अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने भी क्षेत्रीय भाषा के कंटेंट को बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचने का अवसर दिया है।

ऐसे माहौल में विश्वविद्यालय स्तर से तैयार होने वाली फिल्में नई प्रतिभाओं के लिए महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकती हैं।

‘रेत का घेरा’ नाम भी फिल्म के विषय को लेकर उत्सुकता पैदा कर रहा है। फिल्म की कहानी और पात्रों के जरिए हरियाणा की सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को किस तरह प्रस्तुत किया गया है, यह रिलीज के बाद सामने आएगा।

फिल्म निर्माण में सबसे बड़ी चुनौती किसी विचार को स्क्रिप्ट से स्क्रीन तक पहुंचाना होती है। इसके लिए कहानी, संवाद, लोकेशन, कलाकार, कैमरा, साउंड और पोस्ट-प्रोडक्शन जैसे कई स्तरों पर काम करना पड़ता है।

छात्रों द्वारा तैयार फिल्म होने के कारण यह प्रोजेक्ट उनके लिए क्लासरूम की पढ़ाई को वास्तविक अनुभव में बदलने का माध्यम भी बना है।

फिल्म के जरिए छात्रों को टीमवर्क और प्रोडक्शन मैनेजमेंट का भी अनुभव मिला होगा। एक फिल्म तैयार करने में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाने वाले लोगों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी होता है।

युवा फिल्मकारों के लिए ऐसे प्रोजेक्ट भविष्य में फिल्म, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में करियर बनाने में भी मददगार हो सकते हैं।

हरियाणवी भाषा में फिल्म बनाने से स्थानीय संस्कृति और बोली को भी नया मंच मिलता है। क्षेत्रीय कहानियों को स्थानीय भाषा में प्रस्तुत करने से दर्शक उनसे अधिक आसानी से जुड़ सकते हैं।

फिल्म की सितंबर में प्रस्तावित रिलीज को लेकर अब छात्रों और यूनिवर्सिटी समुदाय में उत्साह है।

पहली स्क्रीनिंग से मिलने वाली प्रतिक्रिया फिल्म की टीम के लिए खास होगी, क्योंकि दर्शकों में वे शिक्षक और साथी भी शामिल होंगे, जिनके बीच रहकर उन्होंने फिल्म निर्माण सीखा।

स्क्रीनिंग के बाद फिल्म को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने की तैयारी की जाएगी। इसकी रिलीज के माध्यम और तारीख से संबंधित विस्तृत जानकारी फिल्म की टीम की आधिकारिक घोषणा के साथ स्पष्ट हो सकेगी।

यह पहल अन्य विद्यार्थियों को भी पढ़ाई के दौरान अपने रचनात्मक विचारों पर व्यावहारिक रूप से काम करने के लिए प्रेरित कर सकती है।

मीडिया और फिल्म से जुड़े संस्थानों में केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि वास्तविक प्रोजेक्ट पर काम करने का अनुभव भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

फिलहाल रोहतक यूनिवर्सिटी के छात्रों की तैयार हरियाणवी फिल्म ‘रेत का घेरा’ अपनी पहली स्क्रीनिंग के लिए तैयार है। जिस संस्थान में छात्रों ने फिल्म निर्माण की बारीकियां सीखीं, वहीं से इसके प्रदर्शन की शुरुआत होगी। इसके बाद सितंबर में फिल्म की रिलीज प्रस्तावित है।

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