सिरसा में जमीन रिकॉर्ड सॉफ्टवेयर की खामियों की जांच तेज, DRO-तहसीलदार कमेटी ने किया फील्ड सर्वे; पटवारी-कानूनगो धरने पर

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Sirsa News

सिरसा में जमीन और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े सॉफ्टवेयर की कथित खामियों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सरकार के सख्त रुख के बाद जिला राजस्व अधिकारी (DRO) और तहसीलदार की कमेटी ने फील्ड में उतरकर सर्वे किया। दूसरी ओर सॉफ्टवेयर से जुड़ी समस्याओं और अपनी मांगों को लेकर पटवारी एवं कानूनगो का धरना जारी है। अब कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होने की उम्मीद है।

जानकारी के अनुसार राजस्व विभाग के कामकाज में इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर को लेकर पटवारी और कानूनगो लगातार समस्याएं उठा रहे हैं। उनका कहना है कि तकनीकी खामियों के कारण फील्ड स्तर पर काम प्रभावित हो रहा है और रिकॉर्ड से संबंधित कार्यों को पूरा करने में परेशानी आ रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार की ओर से वास्तविक स्थिति का आकलन करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

इसी क्रम में DRO और तहसीलदार की कमेटी ने फील्ड में पहुंचकर सर्वे किया। कमेटी ने राजस्व कर्मचारियों से बातचीत कर सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करने के दौरान सामने आने वाली परेशानियों की जानकारी जुटाई।

सर्वे के दौरान यह समझने का प्रयास किया गया कि समस्या केवल तकनीकी स्तर पर है या कामकाज की प्रक्रिया में भी बदलाव की जरूरत है।

पटवारी और कानूनगो जमीन से संबंधित रिकॉर्ड, गिरदावरी और अन्य राजस्व कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में डिजिटल सिस्टम में तकनीकी समस्या आने पर आम लोगों से जुड़े काम भी प्रभावित हो सकते हैं।

जमीन रिकॉर्ड में किसी प्रकार की तकनीकी गड़बड़ी होने पर रिकॉर्ड अपडेट करने, विवरण देखने या अन्य प्रक्रियाओं में देरी की स्थिति पैदा हो सकती है।

इसी वजह से सरकार के लिए सॉफ्टवेयर से जुड़ी शिकायतों की वास्तविक स्थिति जानना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दूसरी ओर सिरसा में पटवारी और कानूनगो अपनी मांगों को लेकर धरने पर डटे हुए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि फील्ड स्तर पर सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का समाधान होना चाहिए।

धरने के कारण राजस्व विभाग के नियमित कामकाज पर भी असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।

जमीन संबंधी कार्यों के लिए तहसील और राजस्व कार्यालय पहुंचने वाले लोगों को यदि कर्मचारियों के आंदोलन के कारण काम में देरी होती है तो परेशानी बढ़ सकती है।

सरकार की ओर से गठित या सक्रिय की गई कमेटी की रिपोर्ट इस पूरे विवाद में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

कमेटी फील्ड सर्वे के दौरान सामने आई समस्याओं को दस्तावेज के रूप में दर्ज कर सकती है। इसके बाद रिपोर्ट उच्च अधिकारियों या सरकार को भेजी जा सकती है।

यदि जांच में सॉफ्टवेयर की तकनीकी खामियां सामने आती हैं तो संबंधित तकनीकी एजेंसी को उन्हें दूर करने के निर्देश दिए जा सकते हैं।

वहीं यदि कुछ समस्याएं प्रशिक्षण या सिस्टम के इस्तेमाल से जुड़ी मिलती हैं तो कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जा सकती है।

डिजिटल राजस्व व्यवस्था का उद्देश्य जमीन रिकॉर्ड से जुड़े काम को अधिक पारदर्शी और तेज बनाना है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि सॉफ्टवेयर फील्ड स्तर पर बिना बड़ी तकनीकी बाधा के काम करे।

राजस्व रिकॉर्ड बेहद संवेदनशील होते हैं। इनमें किसी तरह की त्रुटि जमीन के स्वामित्व और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है।

इसी कारण कर्मचारियों की ओर से बताई जा रही तकनीकी समस्याओं का समय पर समाधान जरूरी माना जा रहा है।

फिलहाल सिरसा में DRO और तहसीलदार की कमेटी ने फील्ड सर्वे कर सॉफ्टवेयर की समस्याओं को समझने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। वहीं पटवारी और कानूनगो का धरना जारी है। अब नजर कमेटी की रिपोर्ट और सरकार की अगली कार्रवाई पर है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि तकनीकी खामियों और कर्मचारियों की मांगों के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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