कुरुक्षेत्र। शाहाबाद के नलवी गांव में पूर्व वायुसेना कर्मी तारा सिंह के खेत की खुदाई के दौरान जमीन के नीचे ईंट और चूने की चिनाई से बना पुराना ढांचा मिला है। करीब 12 फीट की गहराई पर मिली एक छोटी संरचना को ग्रामीण गोगाजी की गोगामेड़ी मान रहे हैं। उन्होंने स्थल पर पूजा शुरू कर दी है और वहां नया निर्माण भी कराया जा रहा है। ढांचे की उम्र और पहचान की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
74 वर्षीय तारा सिंह के अनुसार, उनके परिवार ने इस जमीन पर करीब 30 साल से खेती की है। गांव के बुजुर्ग लंबे समय से उनके खेत में पीपल के पेड़ के आसपास पुरानी गोगामेड़ी होने की बात कहते थे। हालांकि उसका स्थान किसी को निश्चित रूप से मालूम नहीं था। हाल में ग्रामीणों के आग्रह पर उन्होंने पीपल के पास खुदाई की अनुमति दी।
तारा सिंह ने बताया कि गुरुवार को खुदाई के दौरान करीब सात फीट नीचे छोटी ईंटों की चारदीवारी दिखाई दी। खुदाई आगे बढ़ाने पर लगभग 12 फीट की गहराई पर कमरे जैसी संरचना के भीतर करीब एक फीट चौड़ी और तीन फीट लंबी आकृति मिली। दीवारों में खांचे भी बने हैं। ग्रामीण इसकी बनावट देखकर इसे 150 से 200 साल पुराना बता रहे हैं, लेकिन यह उनका अनुमान है।
गोगामेड़ी के सेवादार सतपाल कश्यप का कहना है कि उन्हें इस स्थान पर खुदाई की प्रेरणा मिली थी। ढांचा मिलने के बाद ग्रामीण राजस्थान के बागड़ स्थित गोगाजी धाम से दो ईंटें लेकर आए और नए स्थल का निर्माण शुरू किया। खेत तक जाने वाला रास्ता पक्का करने का काम भी चल रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, आसपास के क्षेत्रों से लोग यहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
इस निर्माण का मूल उपयोग, काल और ऐतिहासिक महत्व विशेषज्ञ जांच से ही तय हो सकेगा। फिलहाल किसी पुरातात्विक सर्वेक्षण की जानकारी सामने नहीं आई है।
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