मोहाली कोर्ट ने हिरासत में प्रताड़ना के आरोपों वाली पुनरीक्षण याचिका खारिज की

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Mohali Court

मोहाली की अदालत ने करीब 13 साल पुराने मामले में नयागांव थाने के तत्कालीन पुलिस अधिकारियों और डॉक्टरों के खिलाफ दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने शिकायत खारिज करने के निचली अदालत के आदेश को सही ठहराया। मामला ऑस्ट्रेलिया निवासी अमित कुमार सैनी द्वारा हिरासत में प्रताड़ना और जबड़े में चोट पहुंचाने के आरोपों से जुड़ा था।

शिकायतकर्ता के अनुसार, वह जनवरी 2013 में शादी के सिलसिले में भारत आए थे। उनके परिचितों ने नयागांव पुलिस के कुछ कर्मचारियों पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। नौ जनवरी को संदीप संधू को हिरासत में लिए जाने के बाद सैनी ने वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया और अगले दिन पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई।

सैनी का आरोप था कि इससे नाराज पुलिस अधिकारियों ने उन्हें और संदीप के पिता पवन संधू को जबरन हिरासत में लिया। उन्होंने मोबाइल फोन छीनने, परिवार से संपर्क नहीं करने देने और मारपीट करने के आरोप भी लगाए थे। शिकायत में हिरासत से छोड़ने के बदले 50 लाख रुपए मांगने का दावा किया गया था।

शिकायतकर्ता ने कहा था कि चेहरे और जबड़े में चोट के बावजूद हिरासत तथा पटियाला जेल में उनका एक्स-रे नहीं कराया गया। उनके मुताबिक, जमानत मिलने के बाद सितंबर 2014 में उन्होंने चंडीगढ़ के जीएमएसएच-16 और पीजीआई में जांच तथा उपचार कराया।

उन्होंने मोहाली के सिविल अस्पताल के मेडिकल अधिकारियों डॉ. जसवंत सिंह और डॉ. लवलीन कौर पर पुलिस अधिकारियों से सांठगांठ का आरोप भी लगाया था।

अदालत के समक्ष शिकायतकर्ता ने मुख्य आरोपों के समर्थन में संदीप संधू और पवन संधू को गवाह के तौर पर पेश नहीं किया। जिस मूल मामले में सैनी की गिरफ्तारी हुई थी, उसमें उन्हें दोषी करार दिए जाने का तथ्य भी सामने आया।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के ‘पेप्सी फूड्स लिमिटेड’ सहित संबंधित फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को आपराधिक मुकदमे में समन करना गंभीर न्यायिक कदम है। केवल आरोपों के आधार पर समन जारी नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी गई।

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