मुरथल के ढाबे पर अब इंसान नहीं, रोबोट परोस रहा खाना; तकनीक ने बनाया सर्विस का नया अंदाज

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Murthal

मुरथल के एक ढाबे पर इन दिनों खाना परोसने का अंदाज लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां ग्राहकों की टेबल तक खाना पहुंचाने का काम रोबोट कर रहा है। आधुनिक तकनीक से लैस यह रोबोट ढाबे में एक जगह से दूसरी जगह जाकर ऑर्डर की गई फूड प्लेट ग्राहकों तक पहुंचाता है।

ढाबे पर पहुंचने वाले लोगों के लिए यह अनुभव सामान्य रेस्टोरेंट सर्विस से अलग है। खाना तैयार होने के बाद रोबोट उसे लेकर निर्धारित टेबल तक पहुंचता है। इसके चलते ग्राहक न केवल भोजन का आनंद ले रहे हैं, बल्कि रोबोट की सर्विस को भी अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, रोबोट को सॉफ्टवेयर चिप की मदद से नियंत्रित किया जाता है। इसमें पहले से निर्धारित कमांड और सेंसर सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे यह ढाबे के अंदर रास्ता पहचानकर टेबल तक पहुंच सके। इस तकनीक का उद्देश्य सर्विस को आधुनिक और व्यवस्थित बनाना है।

रोबोट एक बार चार्ज होने के बाद करीब दो घंटे तक लगातार सर्विस दे सकता है। इसके बाद बैटरी को दोबारा चार्ज करने की जरूरत पड़ती है। ढाबे में इसकी मदद से कर्मचारियों का कुछ काम कम करने के साथ-साथ ग्राहकों को नया अनुभव देने की कोशिश की जा रही है।

इस रोबोट की खासियत यह है कि यह केवल एक स्थान पर खड़ा नहीं रहता, बल्कि खाने को लेकर ग्राहकों की टेबल तक जाता है। इसे देखकर खासकर बच्चे और युवा काफी उत्साहित नजर आते हैं। कई ग्राहक रोबोट के साथ वीडियो और फोटो भी बना रहे हैं।

मुरथल पहले से ही अपने ढाबों और खान-पान के लिए देशभर में पहचान रखता है। ऐसे में यहां फूड सर्विस में रोबोट का इस्तेमाल इस क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने वाला कदम माना जा रहा है। इससे ढाबे पर आने वाले ग्राहकों को खाने के साथ एक अलग तरह का अनुभव भी मिल रहा है।

रेस्टोरेंट और होटल उद्योग में ऑटोमेशन का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। रोबोटिक सर्विस के जरिए खाना पहुंचाना इसी बदलाव का हिस्सा है। हालांकि ऐसी तकनीक कर्मचारियों की जगह पूरी तरह लेगी या केवल उनके काम को आसान बनाएगी, यह उसके इस्तेमाल और जरूरत पर निर्भर करेगा।

मुरथल के ढाबे पर रोबोट की सर्विस फिलहाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। पारंपरिक ढाबे के माहौल में आधुनिक तकनीक का यह प्रयोग ग्राहकों के लिए आकर्षण बन गया है। आने वाले समय में यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो खान-पान के क्षेत्र में इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल और बढ़ सकता है।

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