पानीपत में सरकारी रिकॉर्ड ने डेढ़ साल की बच्ची को बनाया कमाऊ सदस्य, परिवार ने प्रशासन से लगाई गुहार

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Panipat

पानीपत में सरकारी रिकॉर्ड से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। एक परिवार का आरोप है कि उनकी महज डेढ़ साल की बच्ची की फैमिली आईडी में करीब 50 हजार रुपये मासिक आय दर्ज कर दी गई। परिवार के मुताबिक बच्ची इतनी छोटी है कि उसकी अपनी कोई कमाई नहीं है, इसके बावजूद रिकॉर्ड में आय दिखने से उन्हें सरकारी दस्तावेजों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

परिवार का कहना है कि फैमिली आईडी में दर्ज गलत जानकारी को ठीक कराने के लिए उन्होंने संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया। उनका आरोप है कि समस्या के समाधान के लिए कई बार प्रयास करने के बावजूद रिकॉर्ड में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद परिवार ने पानीपत के उपायुक्त के समक्ष भी शिकायत रखी और मामले में कार्रवाई की मांग की।

परिवार के अनुसार, फैमिली आईडी में आय से जुड़ी गलत जानकारी दर्ज होने का असर भविष्य में सरकारी योजनाओं और दूसरी प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है। इसी वजह से वे चाहते हैं कि बच्ची के रिकॉर्ड की जांच कर सही जानकारी दर्ज की जाए।

मामला सामने आने के बाद फैमिली आईडी में दर्ज होने वाली आय और अन्य व्यक्तिगत जानकारी की शुद्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। परिवारों के लिए यह जरूरी है कि सरकारी रिकॉर्ड में नाम, उम्र, पता और आय जैसी जानकारियां सही रहें, क्योंकि इन्हीं आंकड़ों के आधार पर कई सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ तय किया जाता है।

परिवार का कहना है कि बच्ची की उम्र और उसकी वास्तविक स्थिति को देखते हुए रिकॉर्ड में दिखाई गई आय स्पष्ट रूप से गलत है। उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द डेटा की जांच कराने और त्रुटि दूर करने की मांग की है।

ऐसे मामलों में संबंधित विभाग के स्तर पर रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाया जा सकता है कि आय की जानकारी किस स्रोत से दर्ज हुई और उसे अपडेट करने की प्रक्रिया में गलती कहां हुई। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रिकॉर्ड में यह आंकड़ा किस तरह दर्ज हुआ।

परिवार को उम्मीद है कि प्रशासन शिकायत पर संज्ञान लेकर जल्द समाधान करेगा। उनका कहना है कि गलत सरकारी रिकॉर्ड के कारण उन्हें आगे किसी योजना या दस्तावेजी प्रक्रिया में परेशानी न हो, इसलिए समय रहते सुधार जरूरी है।

फिलहाल डेढ़ साल की बच्ची की फैमिली आईडी में 50 हजार रुपये मासिक आय दर्ज होने का मामला चर्चा में है। अब देखना होगा कि प्रशासन की जांच में रिकॉर्ड की यह गड़बड़ी कैसे सामने आती है और इसे ठीक करने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है।

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