गई। दोनों पक्षों की सहमति से मामलों को सुलझाने पर विशेष जोर दिया गया, जिससे लोगों को लंबे कानूनी विवादों और खर्च से राहत मिल सके। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया से अदालतों में लंबित मामलों का बोझ भी कम होता है।
कार्यक्रम के दौरान न्यायिक अधिकारियों ने संबंधित विभागों और कर्मचारियों को जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक मामलों को आपसी समझौते से सुलझाने की दिशा में प्रयास किए जाएं ताकि आम लोगों को त्वरित न्याय मिल सके। साथ ही आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए भी तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए गए।
अधिकारियों के मुताबिक लोक अदालत और प्री-लोक अदालत जैसी व्यवस्थाएं लोगों के लिए सरल और प्रभावी न्याय प्रणाली साबित हो रही हैं। इसमें मामलों का समाधान कम समय में हो जाता है और पक्षकारों को बार-बार अदालत के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। कई मामलों में अदालत शुल्क वापसी की सुविधा भी मिलती है।
इस आयोजन के बाद लोगों ने भी संतोष जताया और इसे राहत देने वाली पहल बताया। प्रशासन का मानना है कि ऐसे प्रयासों से न्याय प्रक्रिया अधिक तेज और सुगम बन रही है।
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