दार्जिलिंग में शूटर की फैमिली को डॉग संग होटल में नहीं मिली एंट्री, ट्रैवल एजेंसी पर ₹1.08 लाख जुर्माना

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Rohtak International Shooter

रोहतक की एक इंटरनेशनल शूटर और उनकी फैमिली को दार्जिलिंग यात्रा के दौरान पालतू डॉग के कारण होटल में कमरा नहीं मिलने का मामला सामने आया है। आरोप है कि ट्रैवल एजेंसी के जरिए बुकिंग कराने के बावजूद होटल ने डॉग को साथ रखने की अनुमति नहीं दी। इसके कारण परिवार को करीब आठ घंटे तक दूसरे होटल की तलाश में भटकना पड़ा। उपभोक्ता विवाद में फैसला आने के बाद ट्रैवल एजेंसी पर करीब ₹1.08 लाख का जुर्माना लगाया गया है।

जानकारी के अनुसार रोहतक निवासी इंटरनेशनल शूटर अपने परिवार के साथ दार्जिलिंग घूमने गई थीं। परिवार के साथ उनका पालतू डॉग भी था।

यात्रा की व्यवस्था एक ट्रैवल एजेंसी के माध्यम से कराई गई थी। परिवार का दावा था कि बुकिंग के समय पालतू डॉग साथ होने की जानकारी दी गई थी और उसी के अनुरूप होटल की व्यवस्था होनी थी।

दार्जिलिंग पहुंचने के बाद जब परिवार बुक किए गए होटल में पहुंचा तो वहां डॉग को लेकर समस्या खड़ी हो गई।

होटल प्रबंधन ने पालतू जानवर को कमरे में रखने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद परिवार के सामने तत्काल ठहरने का संकट पैदा हो गया।

परिवार का आरोप है कि यात्रा से पहले सभी जरूरी जानकारियां देने के बावजूद उनके लिए ऐसी प्रॉपर्टी बुक की गई, जहां पालतू जानवर रखने की अनुमति नहीं थी।

होटल में कमरा नहीं मिलने के बाद परिवार को दूसरे ठहरने के स्थान की तलाश करनी पड़ी। अनजान शहर में सामान और पालतू डॉग के साथ होटल ढूंढना उनके लिए मुश्किल साबित हुआ।

बताया गया है कि परिवार करीब आठ घंटे तक दार्जिलिंग में भटकता रहा। इससे उनकी यात्रा का कार्यक्रम भी प्रभावित हुआ और उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।

परिवार ने मामले में ट्रैवल एजेंसी की सेवा में कमी का आरोप लगाया। उनका कहना था कि एजेंसी को बुकिंग करने से पहले होटल की पेट पॉलिसी की पुष्टि करनी चाहिए थी।

विवाद बाद में उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा। वहां दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मामले पर सुनवाई हुई।

उपभोक्ता मामलों में यह देखा जाता है कि सेवा प्रदाता ने ग्राहक को दी गई जानकारी और तय शर्तों के अनुसार सेवा उपलब्ध कराई या नहीं।

यदि ग्राहक ने बुकिंग के समय पालतू जानवर साथ होने की जानकारी दी थी तो ट्रैवल एजेंसी के लिए होटल की नीति की सही जानकारी देना महत्वपूर्ण था।

सुनवाई के बाद ट्रैवल एजेंसी को जिम्मेदार ठहराते हुए करीब ₹1.08 लाख का भुगतान करने का आदेश दिया गया। इसमें विभिन्न मदों के तहत राशि शामिल होने की जानकारी सामने आई है।

यह फैसला उन यात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो पालतू जानवरों के साथ यात्रा करते हैं। होटल बुक करने से पहले संबंधित प्रॉपर्टी की पेट पॉलिसी की लिखित पुष्टि करना परेशानी से बचा सकता है।

सिर्फ “पेट फ्रेंडली” लिखे होने पर निर्भर रहने के बजाय यह भी पता करना जरूरी है कि होटल किस प्रकार और आकार के पालतू जानवरों को अनुमति देता है।

कुछ होटल पालतू जानवर के लिए अतिरिक्त शुल्क या सिक्योरिटी राशि भी लेते हैं। वहीं कुछ स्थानों पर पालतू जानवरों के लिए चुनिंदा कमरे ही उपलब्ध होते हैं।

ऑनलाइन या ट्रैवल एजेंसी के जरिए बुकिंग कराने पर यात्रियों को अपनी विशेष जरूरतों का रिकॉर्ड मैसेज, ईमेल या बुकिंग दस्तावेज में रखना उपयोगी हो सकता है।

इस मामले में रोहतक की फैमिली का दावा था कि यात्रा की योजना पहले से होने के बावजूद होटल में प्रवेश नहीं मिलने के कारण उन्हें आठ घंटे तक परेशान होना पड़ा।

फिलहाल उपभोक्ता विवाद में आए फैसले के बाद ट्रैवल एजेंसी पर करीब ₹1.08 लाख की आर्थिक जिम्मेदारी तय की गई है। मामला यात्रा बुकिंग के दौरान होटल की शर्तों और ग्राहक की विशेष जरूरतों की पहले से स्पष्ट पुष्टि करने की अहमियत को भी रेखांकित करता है।

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