हरियाणा के रोहतक में एक विवादित मामले को लेकर पंचायत ने एसआईटी जांच पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) से जुड़ा है, जहां महिला कर्मचारियों से पीरियड्स से संबंधित सबूत मांगे जाने के आरोप सामने आए थे।
इस प्रकरण की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई थी। अब पंचायत के पदाधिकारियों का आरोप है कि जांच में दोषियों को क्लीन चिट देकर दोबारा बहाल कर दिया गया, जो न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इस तरह का फैसला पीड़ित महिलाओं के साथ अन्याय है और इससे गलत संदेश जाता है।
पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और कई महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले की दोबारा जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
यह मामला सामने आने के बाद से ही संवेदनशील बना हुआ है, क्योंकि इसमें महिला कर्मचारियों की गरिमा और अधिकारों का मुद्दा जुड़ा है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और महिला समूहों ने भी इस पर चिंता जताई है और पारदर्शी कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी तक इस मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुसार की गई हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर जांच प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस विवाद को किस तरह सुलझाता है और क्या दोबारा जांच की मांग पर कोई निर्णय लिया जाता है।
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